झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकृतज्ञता-ज्ञापन
कठिन परिस्थितियो में इस पुस्तक की छपाई हुई । टाईप ढालने वालो ने बेहद परेशान किया । फिर कागज वालो का नम्बर आया । इन सब हैरानियो से किसी प्रकार पार पा लिया । मैं अपने कम्पोजिटरो, प्रेस मैन, और अन्य कर्मचारियो को किन शब्दो में धन्यवाद दूॅ ? मुझे उनकी लगन को देखकर विस्मय होता था । पर वे अपनी रानी के सम्बन्ध की पुस्तक तैयार कर रहे थे । कभी कभी तो रो तक देते थे । मेरे पुत्र चिः सत्यदेव ने जो अथक परिश्रम, अपने थोडे से साधनो के प्रश्रय से किया है उसके लिये क्या कहू । नया रिवाज धन्यवाद का है, परन्तु हम दोनो ज़रा पुरानी संस्कृति में सने हैं, इसलिये उसकी पीठ पर केवल हाथ फेरता हूँ । श्री कालीचरण वर्मा झाँसी के होनहार चित्रकार हैं । रानी के युद्ध का उन्होने जो चित्र दिया है उस पर बहुत परिश्रम किया है । मै कृतज्ञ हूँ । हम दोनो झाँसी के हैं और वह मुझसे आयु में छोटे हैं, इसलिये वे नही चाहते कि कुछ और लिखूं । झाँसी } २४ अक्टूबर, १६४६ } वृन्दावनलाल वर्मा