रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२४ रसरत्नसमुच्चये-
शिला ( Sand stone ), मृत्तिकापाषाण ( Shales ), सुधापाषाण ( lime-stone, ) स्फटिकशिला ( quartzite) आदि जलज और ज्वालामुखी की लावा आदि आग्नेय पाषाणों के नाम लिखे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त उक्त उभय गुणधर्मरहित रूपान्तरितपाषाणखण्डों (Schists) में भी यह पाया जाता है, किन्तु अधिकतर आग्नेय पाषाणखण्डों के ही समीप मिलता है।
पारदीय खनिजों के जमाव का देखने से यह भी विदित होता है कि भूगर्भ में जब आग्नेय पाषाण क्रमशः शीतल होते हुए अपनी द्रवावस्था से घनावस्था में परिणत होने लगे उस समय उड़नशील खनिज जो कि उनके भीतरी भाग में विद्यमान थे वे वाष्परूप में उड़कर ऊपर के समीपवर्ती पाषाण खण्डों की दरारों में जमा हो गये । उनमें पारदीय खनिज भी अन्यतम है। सम्भवतः इसी कारण उष्ण जल के स्रोतों के समीप में पारद आजकल भी पाया जाता है।
अमेरिका के प्रसिद्धभूगर्भविज्ञ रेन्ससम ( Ransome ) और स्पर ( Spurr ) नाम के विद्वानों का विचार है कि पारद सदा ज्वालामुखी आग्नेय पाषाणों के सिलसिले में ही पाया जाता है, क्योंकि इस का अस्तित्व अधिकांश में अर्वाचीन ज्वालामुखी पाषाणों में ही पाया गया है। किन्तु इस सिद्धान्त का स्थित करने में अपवाद यह है कि स्पेन देश की बड़ाखानें जो अल्माडन नामक स्थान में विद्यमान हैं वे भूगर्भकाल के निर्णयानुसार अत्यन्त प्राचीन हैं और उनमें पारद् १३०० फीट की गहराई पर पाया जाता है। इसी प्रकार अमेरिका प्रदेश की केलिफोनिया ( California ), न्यू इड्रिया (New Idria) और न्यू अल्माडन ( New Almaden ) की खाने हैं जिनका सम्बन्ध ज्वालामुखी के उद्गम से नहीं है। इन खानों में २२०० फीट की गहराई पर पारद् मिलता है।
इस प्रकार अनेक मतभेद रहते हुए भी इस बात पर सब भूगर्भ विज्ञों का एकमत है कि पारद भूगर्भ के अन्तराल से उष्ण जल के साथ ही बाहर पृथ्वी पर प्रगट हुआ है और इसीलिये यह अपने खनिजों के साथ भूभाग के ऊपरी तल में ही अधिकतर जमा हुआ मिलता है। जिस उष्ण जल के साथ पारद निकलता है वह जल चाहे वर्षा द्वारा पृथ्वी के अन्तराल के उष्णभाग में जाकर पुनः उष्णस्रोत के रूप में बाहर निकला हो, चाहे पातालिक आग्नेय पाषाणों से निकलकर बाहर आया हो किन्तु यह अनेक प्रमाणों से सिद्ध है कि पारद् उष्ण जल के साथ ही क्षारीय घोलों में घुला हुआ पृथ्वी की ऊपरी दरारों में या खुले भूभाग में आकर प्राकृतिक पारद और पारदीय खनिज हिङ्गुल आदि के रूप में जमा हुआ है।
इसी (रसरत्नसमुच्चय) ग्रन्थ में पारद के उत्पत्ति के विषय में निम्न विचार प्रगट किये गये हैं।