रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
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सुधापाषाण, गैरिक आदि की भूमि में पाया जाता है। सन् १९१७ में ४० फ्लास्क पारद इस प्रदेश से निकला था।
केलिफोर्निया ( California )
सन् १८५० से १९२१ तक केलिफोर्निया पारद निकालने का प्रधान देश रहा है। यहां से २२६११८१ फ्लास्क या ७६२९३ मेट्रिक टन्स पारद वार्षिक निकलता है यह मात्रा प्रसिद्ध स्पेनदेशीय अल्माडन की खानों की निकासा से ५० वर्ष की पारद की पैदाइश के बराबर है। किसी कारण वश केलिफोर्निया की अपेक्षा टेक्सास की पारद की निकासी सन् १९२१ में अधिक रही है। लगभग ८०% फीसदी अमेरिका के संयुक्त राज्य की पैदाइश १० खानों से हुई है। इन खानों में मुख्य न्यूएल्माडन की खान है जहां से सन् १८५० से १९१७ ई० तक १०२११८६३ फ्लास्क पारद निकला है। इस से दूसरे नम्बर पर न्यू इड्रिया की खाने हैं, जहां से सन् १८५८ से १९१७ तक ३०६४७५ फ्लास्क पारद की निकासी हुई है। तीसरा नम्बर ओटहिल का है यहां से सन् १८७६ से १९१७ ई० तक १५२०६६ फ्लास्क पारद की निकासी हुई है। केलिफोर्निया का पारदीय खनिज प्राप्ति का स्थान ४०० मील लम्बा और ७५ मील चौड़ा है और यहां पर प्राचीन व अर्वाचीन ज्वालामुखी के उद्गम चिह्न अनेक पाये जाते हैं। सन् १९१९ ई० में पारदीय खानों के मुख्य जिले सानबेनीटो, न्यू इड्रिया, माइन्स ( San Benito, New Idria Mines ), सान्टा क्लेरा ( Santa clara ), सोनोमा ( Sonoma ), सान लुइस ओबिस्पो (San Luis obispa), नापा (Napa) और लेक ( Lake ) गिने जाते हैं।
कार्न कौन्टी ( Karn county )
कार्न कोन्टीं नाम के प्रान्त में पारदीय खनिज प्राप्ति का जो स्थान है वह केलिफोर्निया के ज्ञात पारदीय खनिज प्राप्ति स्थान से भिन्न है। यहां का कारखाना हाल ही के शोध का फल है। यहां की गहराई केवल ३० फीट ही भूगर्भ में है। यहां से पारद की निकासी हुई है, किन्तु उसका ब्योरा उपलब्ध नहीं है। ग्रेट वेस्टर्न नामक खान से सन् ३८११ से १९०९ तक ९८३१६ फ्लास्क पारद निकाला गया। बाद को यह खान बन्द कर दी गई है। प्रसिद्ध सल्फर-बेङ्क नामक गन्धक की खान से जहां पहिले केवल गन्धक की ही निकासी होती थी ७२४०० फ्लास्क पारद निकाला गया है। यहां के स्रोत के जल से जो गैसें निकली हैं वे कार्बोनिक एसिड, सल्फ्युरेटेड हाइड्रोजन, सल्फर डाई ओक्साइड और मार्श गैस हैं। इन जलों में कार्बोनेट्स, बोरेटस, सोडियम् क्लोराइड ( नमक ), पोटासियम् क्लोराइड, अमोनियम् क्लोराइड ( मोसादर ), व अल्कलाइन सल्फाइड घुले पाये जाते हैं। हिङ्गुल विकृत बेसाल्ट नामक ज्वालामुखी पाषाण खण्डों के तले पाया जाता है जो किसी