भारतकोश
रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा

स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)

DevanagariHindipublished362 पृष्ठ

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तृतीयोऽध्यायः । १०९

पाया जाता है। बोरिङ्ग ( Bowring ) नामक स्थान के पास पेट्रोलियम के स्रोत के समीप समीप मीलों तक पहाड़ी भूमि पर गोदन्ती के साथ गन्धक पाया जाता है। किन्तु यहां पर व्यापारोपयोगी गन्धक की मात्रा मिलने में सन्देह है।

रावल पिंडी के जिले में मशालापास के पूर्वी ओर की पहाड़ी पर गन्धक की खान में काम होता रहा है।

संयुक्त प्रान्त— के देहरादून, जोन्सार जिलों में मेवार ( Maiwar ) नामक स्थान की सीसक ( Lead ) की खान की परिधि में गन्धक पाया जाता है और उसका इतना निकास होता है कि जिससे सीसक निकालने का सारा व्यय प्राप्त हो जाया करता है।

कुमायूँ— जिले के उष्ण स्रोतों से अल्प मात्रा में गन्धक जमा पाया जाता है। कुमायूँ प्रान्त के नीचे लिखे स्थानों का गन्धक प्राप्ति के विषय में विशेषतः उल्लेख है— ( १ ) राम गङ्गा और गजियर नदी के तटवर्ती उष्णस्रोत । ( २ ) नन्द प्रयाग के पास मन्सियारी मुल्ला, दसोली और मुल्लानागपुरा ।

उक्त स्थानों के अतिरिक्त अनेक उष्ण स्रोतों के आसपास में न्यूनाधिक मात्रा में गन्धक पाया जाता है उसको शैलोदक ( Mineral waters ) कहते हैं ।

आज कल माक्षिक का (गन्धक युक्त होने के कारण) गन्धकाम्ल बनाने के लिये अधिकतया व्यवहार किया जाता है। इसलिये गन्धक प्रसङ्ग में गन्धकाम्ल (Sulphuric acid) का संक्षिप्त ब्योरा जानना आवश्यक है। संसार व्यापी यूरोपियन युद्ध के कुछ ही पूर्व युनाइटेड स्टेट्स में लगभग ३५०,००० छोटे टन ( Short tons ) गन्धकाम्ल बनता था। युद्ध की दशा में विस्फोटक ( Explosive ) पदार्थों के निर्माण के लिये इसकी मांग अधिक हो गई। सन् १९१६ में ६२१० ००० टन गन्ध-काम्ल बनाया गया और १९१८ में ८०००००० टन तय्यार किया गया। सन् १९१६ ई० में ४० फी सदी गन्धकाम्ल स्पेनिश माक्षिक ले कर बनाया गया था। शेष ६ फी सदी केनाडियन माक्षिक, १३ फी सदी अमेरिकन माक्षिक, २२ फी सदी ताम्र और यशद के खनिज गलाने से उत्पन्न गन्धकीय वाष्प और शेष १९ फी सदी प्राकृतिक गन्धक लेकर बनाया जाता है। युद्ध के पूर्व प्राकृतिक गन्धक का उपयोग इस कार्य के लिये नहीं किया जाता रहा है। इस लेख से यह स्पष्ट है कि माक्षिक अन्य गन्धक के खनिजों के साथ या स्वतन्त्र ही गन्धकाम्ल बनाने के लिये प्रधानता से उपयोग किया जा रहा है। इस काम के लिये अनेक देश, विशेष कर स्पेन, नारवे (Norway) पोर्चुगाल (Portugal), फ्रान्स, युनाइटेड स्टेट्स आफ अमेरिका, जर्मनी २,००००० टन से अधिक माक्षिक की प्रतिवर्ष निकासी करते हैं।