रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उपलनामानि | २१९ | कजली | २२५ |
| कूपीनिर्माणद्रव्याणि | ,, | रसपङ्कः | ,, |
| कूपीपर्यायाः | ,, | पिष्टी | ,, |
| चषकस्य पर्यायाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| शूर्पादीनां समर्चनम् | ,, | पातनपिष्टी | ,, |
| रसविद्यायां कीदृशा वैद्या अन्ये वा नियोज्यास्तत्कथनम् | २२० | स्वर्णरौप्ययोः कृष्टिः | २२६ |
| रसपाककाले मन्त्रजपस्य कर्तव्यतानिर्देशः | ,, | कृष्ट्या उपयोगः | ,, |
| परिचारकलक्षणम् | ,, | स्वर्णकृष्ट्याः कार्यम् | ,, |
| पद्महस्तवैद्यलक्षणम् | २२१ | वरलोहकम् | ,, |
| अमृतहस्तवैद्यलक्षणम् | ,, | हेमरक्ती | ,, |
| दग्धहस्तवैद्यलक्षणम् | ,, | हेमरक्तीप्रयोगः | ,, |
| निधिरक्षायोग्यपुरुषाः | ,, | ताररक्ती | २२७ |
| बलिसाधने नियोज्यपुरुषलक्षणम् | ,, | दलम् | ,, |
| रसायने नियोज्यपुरुषलक्षणम् | २२२ | अन्यविधदलम् | ,, |
| स्वर्णादिधातुसिद्धिनियुक्तियोग्यपुरुषाः | ,, | शुल्बनागम् | ,, |
| भेषजाहरणे नियोज्यपुरुषलक्षणम् | ,, | शुल्बनागगुणाः | २२८ |
| केषां रससिद्धिर्भवतीत्याह | ,, | पिञ्जरी | ,, |
| रससिद्धसाधकस्य कर्तव्यनिर्देशः | ,, | चन्द्रार्कम् | ,, |
| रससिद्धमर्त्यफलम् | २२३ | निर्वापणम् | २२९ |
| अष्टमोऽध्यायः । | निर्वापणद्रव्यमात्रा | ,, | |
| परिभाषा | २२४ | वारितरलौहलक्षणम् | ,, |
| धन्वन्तरिभागः | ,, | मृतलौहलक्षणम् | ,, |
| रुद्रभागः | ,, | अपुनर्भवलक्षणम् | ,, |
| विश्वासघातकवैद्यलक्षणम् | ,, | उत्तमभस्मलक्षणम् | २३० |
| निरुत्थलौहलक्षणम् | ,, | ||
| बीजलक्षणम् | ,, | ||
| ताडनस्वरूपम् | ,, | ||
| धान्याभ्रलक्षणम् | ,, |