रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| रसकर्मणितैलाहरणोपयोगिद्रव्याणि | २८३ | व्याधिविशेषेरसप्रयोगनिषेधः | २९३ |
| वसावर्गः | ,, | शुद्धमूर्च्छितरसगुणाः | ,, |
| मूत्रवर्गः | ,, | मृतपारदगुणाः | ,, |
| माहिषपञ्चकच्छागलपञ्चकयोर्निर्देशः | २८४ | रसदोषास्तेषां कार्याणि च | ,, |
| अम्लवर्गः | ,, | संस्कारार्थं पारदस्य परिमाणनिर्देशः | २९४ |
| अम्लपञ्चकम् | ,, | स्वेदनसंस्कारः | २९५ |
| पञ्चमृत्तिका | २८५ | मर्दन संस्कारः | २९६ |
| विषवर्गः | ,, | मूर्च्छनसंस्कारः | २९७ |
| उपविषवर्गः | २८६ | उत्थापनसंस्कारः | २९८ |
| दुग्धवर्गः | ,, | पातनसंस्कारः | २९९ |
| विड्वर्गः | २८७ | उर्द्ध्वाधः पातनयोः सङ्ख्यानिर्देशः | ३०० |
| रक्तवर्गः | ,, | अधःपातनविधिः | ,, |
| पीतवर्गः | २८८ | पातने प्रकारान्तराणि | ,, |
| श्वेतवर्गः | ,, | तिर्यक्पातनम् | ३०१ |
| कृष्णवर्गः | ,, | मर्दनादीनां गुणाः | ३०३ |
| रक्तवर्गादीनां प्रयोजननिर्देशः | ,, | निरोधसंस्कारः | ,, |
| शोधनीयगणः | ,, | नियमनसंस्कारः | ३०४ |
| लौहमलनाशनगणः | २८९ | प्रकारान्तरम् | ३०५ |
| लौहकाठिन्यनाशकयोगः | ,, | दीपनसंस्कारः | ,, |
| द्रावकवर्गः | ,, | प्रकारान्तरेण दीपनम् | ३०६ |
| क्षारादिकानां कार्यम् | ,, | रसभावनादौ मूलिन्यः | ३०७ |
| एकादशोऽध्यायः। | सूतसंस्कारकार्यत्वनिर्देशः | ३०९ | |
| रसशोधनादिकथनम् | २९० | रसबन्धनप्रतिज्ञा तस्य व्युत्पत्तिश्च | ,, |
| मानपरिभाषा | ,, | रसबन्धाः | ,, |
| मानपरिभाषायां मतान्तरम् | २९१ | हठबन्धः | ३१० |
| अष्टादशसंस्काराः | २९२ | आरोटबन्धः | ,, |