रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| पेरू | ५० | यौगिकगन्धक | १०२ |
| जुनिन | ५१ | गन्धकनिम्नरूप में मिलता है | १०५ |
| हुवानुको | ” | गन्धक और गन्धकीय खनिज | |
| वीनेजुए | ” | प्राप्ति के स्थान | ” |
| पारद के दोष | ५२ | अफगानिस्तान | ” |
| पारद के सप्तकञ्चुक | ५३ | आसाम | ” |
| पारद के भेद | ५५ | बलुचिस्तान | ” |
| शुद्ध पारद के लक्षण | ५६ | कच्छी | ” |
| अशुद्ध पारद के लक्षण | ५७ | लास बेला | १०६ |
| अभ्रकीयविमर्शः | ५९ | मेकरन तट | ” |
| उत्पत्ति | ” | सिबि | ” |
| वैक्रान्तीयविमर्शः | ६९ | बिहार और उड़ीसा | ” |
| उपलब्धिः | ७० | बम्बई | १०७ |
| मामाक्षिकीयविमर्शः | ७४ | बर्मा | ” |
| स्वर्णमाक्षिक | ” | दक्षिण हैदराबाद | ” |
| रौप्यमाक्षिक | ” | काश्मीर | ” |
| कांस्यमाक्षिक | ” | गोदावरी | १०८ |
| विमलः | ७७ | ट्रावनकोर | ” |
| उपलब्धिः | ” | शिरानी | ” |
| शिलाजतुविमर्शः | ८० | पञ्जाब | ” |
| चपलविमर्शः | ८७ | संयुक्तप्रान्त | १०९ |
| उपस्थिति | ” | कुमायूँ | ” |
| गुण | ८८ | गैरिकविमर्शः | ११० |
| विस्मथ का उपयोग | ” | कासीसविमर्शः | ” |
| रसकविमर्शः | ८९ | हरतालविमर्शः | ११५ |
| गन्धकीयविमर्शः | १०१ | अञ्जनविमर्शः | १२१ |
| उपलब्धि | १०२ | सौवीराञ्जन | ” |