रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| पथ्यस्य प्रयोजनम् | ३८२ | त्रिकत्रयस्वरूपम् | ४०३ |
| सर्वविधज्वरेषु पथ्यानि | ” | श्वासेपथ्यापथ्यम् | ४०५ |
| मध्यमज्वरेहितानि | ३८३ | अपथ्यम् | ” |
| पुराणज्वरे हितानि | ” | अतिव्यायामनिषेधः | ४०६ |
| आगन्तुकज्वरे हितानि | ” | व्यायामानर्हाः | ” |
| विषमज्वरे हितानि | ३८४ | व्यायामार्हा | ” |
| अतिलङ्घनं वर्ज्यम् | ” | व्यायामसमयः | ” |
| सम्यग्लङ्घितलक्षणानि | ” | बलाबललक्षणम् | ” |
| उष्णजललक्षणम् | ” | अधारणीया वेगाः | ” |
| रक्तपित्तविमर्शः | ३८५ | हिक्कास्वरूपं निरुक्तिश्च | ४०७ |
| रक्तपित्तव्याख्या | ” | तासां पूर्वरूपम् | ” |
| रक्तपित्तनिदान और गति | ” | तासां नामानि | ” |
| द्राक्षादिगणौषधियां | ” | धान्याम्लस्वरूपम् | ४०८ |
| लौहारिवर्गः | ३८९ | विश्वादिश्लोकव्याख्या | ४१० |
| रक्तरोधकौषधयः | ” | क्षीरपाकविधिः | ४११ |
| रक्तपित्ते साधारणपथ्यः | ३९० | हिक्कायां पथ्यापथ्यम् | ४१२ |
| कासनिदानम् | ३९१ | त्रिकटुस्वरूपम् | ४१६ |
| पैत्तिककासनिदानम् | ३९४ | त्रिफलास्वरूपम् | ” |
| क्षयकासनिदानलक्षणादिकम् | ” | आरनालस्वरूपम् | ” |
| कफजकासलक्षणम् | ३९५ | दशमूलस्वरूपम् | ” |
| कासघ्नधूमविमर्शः | ३९७ | उभयपञ्चमूलम् | ” |
| धूमसेवनविधिः | ” | स्वरभेदे पथ्यापथ्यव्यवस्था | ४१७ |
| धूमकालाः | ” | अथापथ्यम् | ” |
| धूमपानवर्ज्यावस्था | ” | राजयक्ष्मनिदानम् | ४१८ |
| वातकासे पथ्यानि | ३९८ | राजयक्ष्मलक्षणम् | ” |
| कासेसाधारणपथ्यनिर्देशः | ” | राजयक्ष्मणि साधारणपथ्यम् | ४३४ |
| ऊर्ध्वश्वासलक्षणादिकम् | ३९९ | यक्ष्मीशोधनव्यवस्था | ” |