रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
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| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| हरिद्राद्यं तैलम् | ८९२ | चिकित्सा | ८९४ |
| पलितस्य लक्षणम् | :’ | वृषणकच्छूलक्षणम् | ’ |
| चिकित्सा | ” | चिकित्सा | ” |
| मसूरिकायालक्षणं चिकित्सा च | ” | गुदभ्रंशस्य लक्षणम् | ’ |
| यौवनपिडकाया लक्षणम् | ” | चिकित्सा | ” |
| पद्मिनीकण्टकलक्षणम् | ’’ | मूषकतैलम् | ” |
| चिकित्सा | ’’ | क्षुद्ररोगेषु पथ्यापथ्यविधिः | ” |
| जतुमणिलक्षणम् | ” | स्वरभेदे पथ्यापथ्यव्यवस्था | ९०५ |
| चिकित्सा | ’’ | श्लोपदरोगे पथ्यापथ्यविवेकः | ९०८ |
| मशकलक्षणम् | ’ | स्थौल्ये पथ्यापथ्यम् | ९१० |
| चिकित्सा | ’’ | त्रिफलारसायनस्य विमर्शः | ९३३ |
| तिलकालकलक्षणम् | ’ | कामकलाख्यरसनिर्माणप्रकारान्तरम् | ९४७ |
| चिकित्सा | ’’ | पूर्णेन्दुरसः | ९५० |
| न्यच्छस्य लक्षणम् | ” | मण्डकपरिभाषा | ९६३ |
| व्यङ्गस्यलक्षणम् | ’ | कान्तलौलक्षणम् | ९८० |
| तयोश्चिकित्सा | ’’ | लौहशोधनार्थे काथविधिः | ९८१ |
| परिवर्त्तितकालक्षणम् | ’’ | वङ्गभस्मविधिः | ९८२ |
| चिकित्सा | ’’ | अथवा | ” |
| अथवा | ’’ | नागभस्मविधिः | ” |
| अवपाटिकालक्षणम् | ८९३ | अथवा | ” |
| चिकित्सा | ” | लौहमारणविधिः | ९८३ |
| निरुद्धप्रकषस्यलक्षणम् | ’ | निरुत्थभस्मपरीक्षाप्रकारः | ९८४ |
| चिकित्सा | ’’ | कुटीनिर्माणप्रकारः | ९८६ |
| सन्निरुद्धगुदलक्षणम् | ’’ | चरकोक्ताचाररसायनम् | १०६६ |
| चिकित्सा | ’ | ||
| अहिपूतनलक्षणम् | ८९४ |