रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ ५ ]
५ ऊर्ध्वाधःपातनयन्त्रवर्णनम्।
अष्टाङ्गुलपरीणाहमानाहेन दशाङ्गुलम् ।
चतुरङ्गुलकोत्सेधं तोयाधारं गलादधः ॥ १ ॥
अधोभाण्डमुखं तस्य भाण्डस्योपरिवर्तिनः ।
षोडशाङ्गुलविस्तीर्णपृष्ठस्याऽस्ये प्रवेशयेत् ॥
पार्श्वयोर्महिषीक्षीरचूर्णमण्डूरफाणितैः ।
लिप्त्वा विशोषयेत् सन्धिं जलाधारे जलं क्षिपेत् ॥ ३ ॥
चुल्ल्यामारोपयेदेतत् पातनाथन्त्रमीरितम् ॥ ४ ॥
अष्ट अङ्गुल परिधियुक्त, दश अङ्गुल दीर्घ तथा चार अङ्गुल मोटा एक मिट्टी का भाण्ड लेकर उसमें शीतल जल भर दें। फिर सोलह अङ्गुल चौडे पृष्ठ (पीठ) वाला एक भाण्ड लेकर उसके भीतरी भाग में औषधपिष्ट पारद कल्क का लेप करके सुखाकर अधोमुख करके जलपूर्ण घट की ग्रीवा के नीचे तक इसके मुखको