रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ १० ]
१० तप्तखल्लयन्त्रवर्णनम्
तत्रादौ तस्य प्रमाणकथनम्--
लौहो नवाङ्गुलः खल्लो निम्नत्वे च षडङ्गुलः ।
मर्दकोऽष्टाङ्गुलश्चैव तप्तखल्लाभिधोऽप्ययम् ॥ १ ॥
९ अङ्गुल की लम्बी तथा उतनी ही चौडी और ६ अङ्गुल गहरी लौह की खरल बनवानी चाहिए तथा उसकी घर्षणी (मर्दक) ८ अङ्गुल की लम्बी बनवानी चाहिए। यह तप्त खल्ल का प्रमाण है ॥ १ ॥
तप्तखल्लविधिः--
कृत्वा खल्लाकृतिं चुल्ली मङ्गारैः परिपूरिताम् ।
तस्यां निवेश्य तं खल्लं पार्श्वे भस्त्रिकया धमेत् ॥
तदन्तर्मर्दिता पिष्टिः क्षारैरम्लैश्च संयुता ॥ १ ॥
प्रद्रवत्यतिवेगेन स्वेदिता नात्र संशयः ।
सूतः कान्तायसा सोऽयं भवेत् कोटिगुणो रसः ॥ २ ॥
जितने प्रमाण की लम्बी चौडी खरल बनी हुई हो उसी के प्रमाणानुकूल चूल्हा बनवा कर उस में कोयले आदि भर के उस पर खल्ल को रख दे तथा नीचे अग्नि जला देवे और पार्श्व में धौकनी लगा कर वह्नि को प्रदीप्त करते रहना चाहिए, पश्चात् उस खरल में औषधियों के साथ घोट कर बनाई हुई