भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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१८२ रसार्णवे हेम शुल्कं¹ तथा तीक्ष्णं वाजरं च पडालकम्² । रौहणं कान्तलोहं च³ जारयेत्तत्स्वसंख्यया ॥ १६२ ॥ एकंके⁴ रसराजोऽयं बद्धः⁵ खेचरतां नयेत्⁶ । गन्धनागे द्रुते⁷ देवि जारणां सुकगां शृणु⁸ ॥ १६३ ॥ आदौ⁹ संशोधितं सूतं रजनीचूर्णसंयुतम्¹⁰ । मर्दयेद्यावदारुणं¹¹ चालयेदुष्णकाञ्चिकैः ॥ १६४ ॥ एवं मुहुर्मुहुर्घृष्टो गन्धनागो द्रुतिं चरेत्¹² ॥ १६५ ॥ नागस्य मूत्रं¹³ देवेशि वत्सस्य महिषस्य वा¹⁴ । आवर्त्त्यावर्त्त्य भुजगं¹⁵ सप्त वारान् निषेचयेत्¹⁶ ॥ १६६ ॥ (1) B reads रांमशुल्क. K reads समशुल्य. (2) वाजरं च पटालगं, a variant in B. मारसल पडालग, a variant in K. [Vide ante 7th Paṭala, v. 107.] (3) Both B and M read काचिलोह. च. (4) K reads एकंक (without any suffix). (5) M reads बद्ध, which is incorrect. (6) B reads नयम्, which is inc. (7) B has गंधनागे द्रुतं. K has गधानागद्रुत. M has गन्धनागद्रुतं. (8) कुरुषां भृण, an incorrect reading in B. कुरया शृणु, a reading in K, which has no sense. (9) M reads अद्य. (10) रजनीचूर्वसयुत, a variant in K. रजनीचूर्णमिश्रितम्, a variant in M. (11) B reads यावदोहरु, which seems to be the error of the scribe. (12) गंधनागद्रुति चरेत्, a variant in B. गंधनाग. द्रुति चरं, a variant in K. Both the texts are inc. (13) K reads. सूत्र, which is not correct. M reads नरस्य मूत्रे. (14) M has च. (15) B reads तजग, which is incorrect. आवलीवर्तन. नाग, a variant in K. (16) B reads सप्तवारं. K reads सप्तबार निषंधयेत्, wherein the last term. is incorrect.