भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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२३४ रसार्णवे अयं च¹ स्पर्शमात्रेण लोहान्यष्टौ²च वेधयेत् ॥ १८८ ॥ तद्रसेन³ रसं भाव्यं वज्रेण समजारितम् । चतुःषष्टांशतः पिण्डे⁴ द्विगुणे तु⁵ सहस्रकम् ॥ १८९ ॥ दशसंकलिका⁶बद्धं गुञ्जामात्रं रसं नरः⁷ । त्रिलोहवेष्टितं वक्त्रे धृत्वा चादृश्यतां व्रजेत्⁸ ॥ २०० ॥ ॐ नमो रुद्राय दंष्ट्रोत्कटाय⁹ विघ्ननाशाय¹⁰ दिशां रक्ष रक्ष विदिशां रक्ष रक्ष रुद्रो विज्ञापयति¹¹ हुं फट् स्वाहा ॥ ॥ इति दिग्बन्धनमन्त्रः¹² ॥ ॐ नमो भगवते रुद्राय त्रिशूलहस्ताय¹³ अमृतोद्भवाय¹⁴ रक्ष रक्ष हुं फट् स्वाहा ॥ ॥ इति पानमन्त्रः¹⁵ ॥ अथातः संप्रवक्ष्यामि कर्पूरौरसबन्धनम्¹⁶ ॥