भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 303, कुल 558 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 303

२८० रसार्णवे अनेन द्रुतियोगेन देहलोहकरो रसः¹ ॥ ३१ ॥ इति श्रीपार्वतीपरमेश्वरसंवादे² रसार्णवे रससंहितायां द्रुतिबन्धनो नाम³ त्रयोदशः पटलः ॥ १३ ॥


(1) K has an incomplete charana—देहकरी रसः. (2) This is not found in B. (3) B has सारणारसबन्धो नाम. K has द्रुतिबद्धी नाम, which is grammatically incorrect. In the beginning of this Paṭala, we find in K, that the god Bhairava proposes to explain वज्र- जारणा. But as the Paṭala ends in several varieties of द्रुतिबन्ध, so it is named as द्रुतिबन्धन instead of वज्रजारण.

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक) · पृष्ठ 303, कुल 558 में से · BharatKosha