भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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२८४ रसाणर्वे दशसंकलिकाबद्धः शब्दवेधी महारसः । यथा लोहे तथा देहे क्रमते नात्र संशयः¹ ॥ १८ ॥ वेधयेत्तत्प्रमाणेण धातुश्चैव² शरीरकम् । कारयेद्गुटिकां³ दिव्यां बदरास्थि⁴प्रमाणतः ॥ १६ ॥ महाकालीं पूजयित्वा⁵ धारयेत् सततं बुधः⁶ । तस्य⁷ मन्त्रं प्रवक्ष्यामि त्रिदशैरपि दुर्लभम्⁸ ॥ २० ॥ प्रणवो भुवनेशीबीजं⁹ लक्ष्मीबीजं ततः परम्¹⁰ ॥ २१ ॥ ॐ ह्रीं श्रीं कालिका¹¹कालि महाकालि मांसशोणितभोजिनि¹²। क्रीं क्रीं हुं¹³ रक्तकृशमुखि देवि¹⁴ रससिद्धिं प्रदत्स्व¹⁵ मे ॥२२॥ (1) क्रमेन्नात्र न संशयः, a variant in D, which is partly correct. (2) D reads धातु चैक. K reads धातु चैव. (3) B reads घटिकां, which is not correct. (4) K reads वदर्यास्थि, which is incorrect. (5) K reads तु after पूजयित्वा ; but it is redundant. (6) Both D and K read बुधैः, which is grammatically incorrect. (7) K reads तस्या. (8) This hemistich is not found in D. (9) प्रणवं बीज- षड्क्य, a variant in B. D wants this hemistich. प्रणवभुवनेशीनील, a variant in K. (10) B reads पुनः. K reads लक्ष्मोः बीज, which is not correct. (11) The word कालिका is not found in B. (12) B reads भोजिनौ, which is incorrect. D has an incomplete charana मांसशोचितने. K reads भाजनं. (13) D has क्रीं क्र क्रीं. K has क्रीं क्रीं हुं हुं. (14) रक्तकृशमुखो देवी, a reading in B. रक्तकृष्यामुखितकेन्दौ, a reading in D. रक्तकृष्णामुखि देवि, a reading in K. (15) K reads रससिद्धिर्ददस्व, which is incorrect.