भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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WITH GLOSSARY. 27

chholá, Hindi chanakloni ) ६४ चण्ड ( A fierce god, who is called भूतकालान्तक or destroyer of elements or existing beings) ४३६ चण्डाजी ( लिङ्गिनीलता according to राजनिघण्टु, but भूम्या- मलकी according to रसकाम- धेनु ) ५८ चण्डालीकन्द (= चण्डालकन्द, known as chandálsák ) ३३३ चन्दन ( Santalum Album, Linn. ) ६ चन्द्र (=तार = Silver ) २७०, ४२७ चन्द्रतोय ( See चन्द्रोदक ) २३२ चन्द्रवल्ली (=सोमलता according to राजनिघण्टु, but वाकुची and सोमा according to रस- कामधेनु ) ३४२ चन्द्रहेम ( The amalgam of silver and gold ) २०६ चन्द्रार्क ( The amalgam of silver and copper. "भागाः षोडश तारस्य ताम्रस्य द्वादशैकया। आवत्तितास्तु चन्द्रार्कं वर्णोत्कषे- करद्वयम् ।"—(रसकामधेनु) २८६, ३०८ &c. चन्द्रार्कपत्र ( Plates of silver and copper alloyed together ) १३६, २२३ चन्द्रार्कादि ( The moon, the sun and the rest ) ४३४ चन्द्रोदक (Moon-water or rather, fullmoon-water) (Definition- of ) २३१, ( Effect of ) २३३ चपल ( One sort of महारस, "(ईश्वरस्य) माक्षिकं कर्पूरजमलं सौवीराद्यं च नेत्रजम् । नागा- मलं तु चपलं मलं देहस्य टङ्क- णम् ॥” “नानाविधं विजानीयात् चपलाख्यं महारसम् । नाग- तारविशस्वर्णवज्रतीक्ष्णादिपूर्व- कम् ॥” “त्रिंशत्पलमितं नागं भानुदुग्धेन मर्दितम् । विमर्द्य पुटयेत्तावत् यावत् कर्षावशि- ष्टम् । न तत् पुटसहस्रेण क्षय- मायाति सर्वथा । चपलोऽयं समाख्यातो वार्तिकैर्नागसम्भवः ॥ इत्थं हि चपलः कार्यो वज्र-