भारतकोश
रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

रसार्णव (शैव रस-तन्त्र - प्राचीन भारतीय खनिज रसायन, धातुवाद एवं रस-चिकित्सा सटीक)

Rasarnava: Tantric Chemistry and Alchemy with Commentary

शिव-पार्वती संवाद (सम्पादक: प्रफुल्लचन्द्र राय एवं हरीशचन्द्र कविराज) द्वारा

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। स उच्यते ।"

Wait, look at the last line: "यस्तु तमखल्लः स उच्यते ।" " Wait, the word "तमखल्लः": Look at it: "तमखल्लः" or "तमखल्लः,"? It's "तमखल्लः स उच्यते ।" And there is a closing quote: ।" Wait, look at "द्वादशांगुलविस्तारः": Is it "द्वादशांगुलविस्तारः" or "द्वादशाङ्गुलविस्तारः"? In line R20: "द्वादशांगुलविस्तारः" (it has an anusvara on 'शा': 'द्वादशांगुलविस्तारः'). Wait, look at 'खल्लो': 'ख', 'ल्लो' -> 'खल्लो'. Line R21: 'भवति वर्तुलः ।' (or 'वर्त्तुलः'? It has double त: 'वर्त्तुलः' or single 'वर्तुलः'? It looks like 'वर्त्तुलः' with a horizontal stroke across 'त', very common in 19th/early 20th century print). Let's look at 'वर्तुलः': 'व', 'र्', 'तु' or 'त्तु'? It looks like 'वर्तुलः' or 'वर्त्तुलः'. Then: 'लोहेनिर्मितो' or '