रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३३६ ) रसेन्द्रसारसंग्रह । पारा, लोहभस्म, तांबाभस्म, अभ्रकभस्म और मोतीभस्म यह प्रत्येक औषधि एक एक भाग, हीराभस्म पारेसे चौथाई भाग, मैन- शिल, गन्धक, हरितालभस्म, शुद्ध तूतिया, रसौत, समुद्रफेन, काला सुर्म्मा और पांचों लवण यह प्रत्येक औषधि एक एक भाग लेवे । इन सब औषधियोंको भांगरेके रसमें, चित्रककी जड़के रसमें और थूह- रके दूधमें एक २ दिन तक खरल करके पिंडाकार बनाकर मूषामें रख- कर गजपुटमें पकावे । इसमेंसे दो रत्ती परिमाण औषधि अदरखके रसके साथ सेवन करके पश्चात् ऊपरसे पीपलका चूर्ण दशमूलके क्वाथमें डालकर पान करे । तथा इसके ऊपर रोगीको कड़वी तोम्बीसे स्वेद देवे । इसपर तीक्ष्ण और रूक्ष पदार्थोंको त्याग देवे । तथा भैंसका घी, दूध और भारी पदार्थ भक्षण करे। तथा कड़वे तेलका शरीरमें मर्दन करे। इससे भूतोन्माद दूर होता है। इसको भूतांकुश रस कहते हैं ४-