भारतकोश
रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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( XIV ) मोहन रुप छकी वन २०२ मोहन सो अटक्यौ मनु २६३ मोहनी मोहन सो रसखानि १७५ यह देखि धतूरे के पात ३१८ याही तैं सब मुक्ति ३३० रग भर्यौ मुसकात लला २१६ रसमय स्वाभाविक विना ३३२ रसखान सुनाय वियोग ३०३ राधा माधव सखिन ३३५ लगर छैलहि गोकुल मैं २२२ लाय समाधि रहे ब्रह्मादिक १६१ लाज के लेप चढाइ कै ३१४ लाडली लाल लसै १७६ लाल लसै पगिया सबके १८६ सीने अबीर भरे पिचका २७६ लोक की लाज तज्यौ २०३ लोक वेद मरजाद सब ३२२ लोग कहै ब्रज के २३४ लाल की आज छठी १७६ वह गोधन गावत गोधन मैं २६१ वह घेरनि धेनु अबेर १८६ वह नन्द को साँवरो छैल २०१ वह सोई हुती परजंक ३००