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रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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: ३ : रसखान की रचनाएँ रसखान, अन्य कृष्णभक्त-कवियो की भाँति,मूलत भक्त थे। कविता इनका कर्म नही, वरन् भावाभिव्यक्ति का एक साधन मात्र था। इन्हें जब भी भावावेश हुआ, वह सवैया या कवित्त के माध्यम से फूट पड़ा। इनके छंदों की संख्या कितनी है ? इस प्रश्न का निर्विवाद उत्तर देना असम्भव है। तुलसीदास जी के 'भक्तमाल प्रदीपन' के अनुसार इन्होने सहस्त्रो कवित्तो की रचना की ।¹ पर अब रसखान के नाम से प्राप्त होने वाले असदिग्ध और संदिग्ध छंदो को मिलाकर कुल ३३४ छंद प्राप्त हुए है। प्रस्तुत सकलन मे इन छंदो को पाँच भागो मे विभाजित किया गया है— १. सुजान-रसखान २५५ छंद २. प्रेम-वाटिका ५३ छंद ३. दान-लीला ११ छंद ४. स्फुट-छंद ५ छंद ५. संदिग्ध-छंद १० छंद इन भागो का क्रमश. परिचय निम्नलिखित है। सुजान-रसखान सुजान-रसखान मे संकलित छंदो का विषय कृष्ण-भक्ति के विविध पहलुओ से सम्बद्ध है। इन छंदो को निम्नलिखित शीर्षको के अन्तर्गत विभाजित किया गया है— १ भक्ति-भावना, २. कृष्ण का अलौकिकत्व, ३. अनन्यभाव, ४ मिलन १. रसखान जी भागकर वन में जा छिपे और विरन्दावन मे बास करके हजारह, (सहस्रो) कवित विरन्दावन के, व सुभाव (स्वभाव, गुण) व शोभा प्रिया-प्रियतम के तसनीफ (पुस्तक लिखकर) भेंट किये।