ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 101, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रार्थना १०-१५ स्तुति, वज्रधारी, नशीला सोम, आह्वान, असह्य, जानना १६-२१ रक्षासाधन युक्त, वीर, पशु याचना व सोमरस याचना, आह्वान, सेवनीय मित्र, आह्वान, वृद्धि करना २२-२९ शक्ति धारण, वृत्रनाश, अनुकूल बनना, अन्न देना, हव्य वहन, रक्षक ३०-३६ प्रसन्न होना, पालक, देवों का, मेधातिथि ऋषि, गोदान, स्तुति ३७-४२ ३. इंद्र की स्तुति एवं राजा पाकस्थामा का वर्णन १-२४ प्रसन्न रहने व सुखी करने की प्रार्थना, स्वामी, महिमागान, आह्वान १-५ विस्तार करना, स्तुति, ओज बढ़ाना, भृगु, प्रस्कण्व, महिमा, धन याचना, पुरु, रूशम आदि, महिमा, धनस्वामी, पूजन, दर्शनीय ६-१७ स्तुति, अर्बुद व मृग का हनन, प्रकाशन, शोभा पाना, लाल घोड़ा, भुज्यु, स्तुति १८-२४ ४. इंद्र, अश्विनीकुमारों एवं पूषा की स्तुति १-२१ अनुपुत्र, कण्वगोत्रीय ऋषि, आह्वान, शक्ति धारण, धराशायी होना, वीरपुत्र की प्राप्ति, महान कार्य, ढकना १-८ सभा में जाना, धनस्वामी, इंद्र का आना, सोमरस रखना, सुशोभित होना, हरि नामक घोड़े, पापत्राता, धन देना, कामना, वज्र, सामज्ञाता पज्र, दीप्तिशाली, धन प्राप्ति १२-१९ मेधातिथि, प्रसन्न होना २०-२१ ५. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-३९ प्रकाश फैलाना, रथ में जुड़ना, प्रार्थना, स्तुति, घर जाना, हव्यदाता १-६ आह्वान, पशु, अन्न, धन मांगना, सोमपान की प्रार्थना, धनी, स्तुतियों की रक्षा व धनवहन हेतु प्रार्थना ७-१६ बुलाना, स्तुति समूह समीपवर्ती होने, सोमपान करने, अन्न व सरिताओं को लाने की प्रार्थना, भुज्यु, कण्व, धनसम्पन्न, आवत, अत्रि आदि, अंक्ष, अगस्त्य १७-२६ धन याचना, आह्वान, रथ, आह्वान, धन, बल, आदि लाने का आग्रह शीघ्रगामी घोड़े, ebook converter DEMO Watermarks*