भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1021, कुल 1855 में से

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जहर में बुझे हुए, हिंसक नोक वाले, लोहे के अग्रभाग वाले एवं पर्जन्य से उत्पन्न विशाल बाण देव को नमस्कार है. (१५) अवसृष्टा परा पत शरव्ये ब्रह्मसंशिते. गच्छामित्रान्प्र पद्यस्व मामीषां कं चनोच्छिषः.. (१६) हे मंत्र द्वारा तेज किए हुए एवं हिंसाकुशल बाण! तुम छोड़े जाने पर जाओ और शत्रुओं पर गिरो. उन में से किसी को भी मत छोड़ना. (१६) यत्र बाणाः सम्पतन्ति कुमारा विशिखा इव. तत्रा नो ब्रह्मणस्पतिरदितिः शर्म यच्छतु विश्वाहा शर्म यच्छतु.. (१७) जिस युद्ध में मुंडितशिर कुमारों के समान बाण गिरते हैं, वहां ब्रह्मणस्पति एवं अदिति हमें सदा सुख दें. (१७) मर्माणि ते वर्मणा छादयामि सोमस्त्वा राजामृतेनानु वस्ताम्. उरोर्वरीयो वरुणस्ते कृणोतु जयन्तं त्वानु देवा मदन्तु.. (१८) हे राजन्! मैं तुम्हारे मर्मस्थलों को कवच से ढकता हूं. राजा सोम तुम्हें अमृत से ढकें. वरुण तुम्हें बड़े से बड़ा सुख दें. तुम्हारी विजय पाने के बाद देव प्रसन्न हों. (१८) यो नः स्वो अरणो यश्च निष्ट्यो जिघांसति. देवास्तं सर्वे धूर्वन्तु ब्रह्म वर्म ममान्तरम्.. (१९) हमारे जो परिवारी जन हमसे प्रसन्न नहीं हैं एवं जो दूर रहकर हमें मारना चाहते हैं, सभी देव उन्हें मारें. मंत्र ही हमारी रक्षा करने वाले कवच हैं. (१९)