ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1027, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसींचते हैं. वे अग्नि को इसी प्रकार चाटती हैं, जिस प्रकार गाय अपने बछड़े को चाटती है. (५) उत योषणे दिव्ये मही न उषासानक्ता सुदुघेव धेनुः. बर्हिषदा पुरुहूते मघोनी आ यज्ञिये सुविताय श्रयेताम्.. (६) युवा, दिव्य, महान्, कुशों पर बैठे हुए, बहुतों द्वारा स्तुत, संपत्ति के स्वामी एवं यज्ञ के पात्र निशा-दिवस कामधेनु गाय के समान कल्याण के निमित्त हमारा आश्रय लें. (६) विप्रा यज्ञेषु मानुषेषु कारू मन्ये वां जातवेदसा यजध्यै. ऊर्ध्वं नो अध्वरं कृतं इवेषु ता देवेषु वनथो वार्याणि.. (७) हे मेधावी, धनसंपन्न एवं मनुष्यों द्वारा किए जा रहे यज्ञों में काम करने वाले होताओ! मैं यज्ञ करने के हेतु तुम्हारी स्तुति करता हूं. स्तुतियां पूर्ण हो जाने पर हमारे यज्ञ को देवों की ओर प्रेरित करो एवं देवों के पास विद्यमान धन हमें दो. (७) आ भारती भारतीभिः सजोषो इळा देवैर्मनुष्येभिरग्निः. सरस्वती सारस्वतेभिरर्वाक् तिस्रो देवीर्बर्हिरिदं सदन्तु.. (८) सूर्य की पत्नी भारती अर्थात् अग्नि सूर्यसंबंधियों तथा इस मनुष्यलोक के देवों के साथ आवें. सरस्वती मध्यस्थित देवों के साथ पधारें. तीनों देवियां यज्ञ में कुशों पर बैठें. (८) तन्नस्तुरीपमध पोषयित्नु देव त्वष्टर्वि रराणः स्यस्व. यतो वीरः कर्मण्यः सुदक्षो युक्तग्रावा जायते देवकामः.. (९) हे त्वष्टा देव! तुम प्रसन्न होते हुए ऐसा शीघ्रताकारक एवं पोषक वीर्य हमें प्रदान करो, जिसके द्वारा हम कार्यकुशल, शक्तिशाली, सोम निचोड़ने हेतु पत्थर उठाने वाले, देवाभिलाषी एवं वीरपुत्र उत्पन्न करें. (९) वनस्पतेऽव सृजोप देवानग्निर्हविः शमिता सूदयाति. सेदु होता सत्यतरो यजाति यथा देवानां जनिमानि वेद.. (१०) हे वनस्पति! देवों को हमारे पास लाओ. अग्निरूप वनस्पति संस्कारक होकर देवों के प्रति हव्य को प्रेरित करें. वे ही देवों के बुलाने वाले बनकर यज्ञ करते हैं. वे देवों का जन्म जानते हैं. (१०) आ याह्यग्ने समिधानो अर्वाङ् इन्द्रेण देवैः सरथं तुरेभिः. बर्हिर्न आस्तामदितिः सुपुत्रा स्वाहा देवा अमृता मादयन्ताम्.. (११) हे प्रज्वलित अग्नि! तुम इंद्र एवं शीघ्रता करने वाले अन्य देवों के साथ एक रथ पर ebook converter DEMO Watermarks*