ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1052, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंओर उन्मुख बना दिया है. युद्ध में तुम उन्हीं नेताओं के कल्याणकारी, मित्र एवं रक्षक बनो. (१०) नू इन्द्र शूर स्तवमान ऊती ब्रह्मजूतस्तन्वा वावृधस्व. उप नो वाजान्मिमीह्युप स्तीन्यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (११) हे शूर इंद्र! तुम स्तुतियां सुनकर और मंत्रों के भागी बनकर अपने शरीर से बढ़ो तथा हमें अन्न व घर दो. तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (११) सूक्त—२० देवता—इंद्र उग्रो जज्ञे वीर्याय स्वधावाञ्चक्रिरपो नर्यो यत्करिष्यन्. जग्मिर्युवा नृषदनमवोभिस्त्राता न इन्द्र एनसो महश्चित्.. (१) शक्तिशाली एवं ओजस्वी इंद्र अपना वीर्य प्रकाशित करने के लिए उत्पन्न हुए हैं. मानवहितकारी इंद्र जो कर्म करना चाहते हैं, वह अवश्य करते हैं. रक्षासाधनों के साथ यज्ञभवन में जाने वाले इंद्र हमें महान् पाप से बचावें. (१) हन्ता वृत्रमिन्द्रः शूशुवानः प्रावीन्नु वीरो जरितारमूती. कर्ता सुदासे अह वा उ लोकं दाता वसु मुहुरा दाशुषे भूत्.. (२) वर्धमान होकर वृत्र का वध करने वाले वीर इंद्र स्तोता को अपने रक्षा साधनों से सुरक्षित करते हैं. वे सुदास के लिए जनपद का निर्माण करने वाले एवं यजमान को धन देने वाले हैं. (२) युध्मो अनर्वा खजकृत्समद्वा शूरः सत्राषाड्जनुषेमषाळ्हः. व्यास इन्द्रः पृतनाः स्वोजा अधा विश्वं शत्रूयन्तं जघान.. (३) योद्धा, शत्रुरहित, युद्ध करने वाले, झगड़ालू, शूर, अनेक जनों को पराजित करने वाले, स्वभाव से ही अपराजित एवं उत्तम शक्ति वाले इंद्र शत्रुसेना के मार्ग में बाधा डालते हैं एवं शत्रुता करने वाले का वध करते हैं. (३) उभे चिदिन्द्र रोदसी महित्वा पप्राथ तविषीभिस्तुविष्मः. नि वज्रमिन्द्रो हरिवान्मिमिक्षन्त्समान्धसा मदेषु वा उवोच.. (४) हे अधिक संपत्तिशाली इंद्र! तुमने अपने महत्त्व और शक्ति से द्यावा-पृथिवी दोनों को पूर्ण किया. हरि नामक अश्वों के स्वामी इंद्र शत्रुओं पर वज्र फेंकते हुए यज्ञों में सोमरस द्वारा सेवित होते हैं. (४) वृषा जजान वृषणं रणाय तमु चिन्नारी नर्यं ससूव. ebook converter DEMO Watermarks*