भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1059, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1059

एष स्तोमो मह उग्राय वाहे धुर्यो३ वात्यो न वाजयन्नधायि. इन्द्र त्वायमर्क इट्टे वसूनां दिवीव द्यामधि नः श्रोमतं धाः.. (५) रथ के घोड़े के समान शक्तिशाली यह मंत्रसमूह महान्, उग्र एवं विश्वभारवहन समर्थ इंद्र को लक्ष्य करके बनाया गया है. हे इंद्र! यह स्तोता तुमसे धन मांगता है. तुम हमें स्वर्ग के समान तेजस्वी पुत्र दो. (५) एवा न इन्द्र वार्यस्य पूर्धि प्र ते महीं सुमतिं वेविदाम. इषं पिन्व मघवद्भ्यः सुवीरां यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (६) हे इंद्र! इस प्रकार तुम हमें उत्तम धन से पूर्ण करो. हम तुम्हारी महती दया प्राप्त करें. हम हव्य वालों को वीर पुत्रों से युक्त अन्न दो एवं सभी कल्याणसाधनों से हमारी रक्षा करो. (६) सूक्त—२५ देवता—इंद्र आ ते मह इन्द्रोत्युग्र समन्यवो यत्समरन्त सेनाः. पताति दिद्युन्नर्यस्य बाह्वोर्मा ते मनो विष्वद्र्य१ग्वि चारीत्.. (१) हे उग्र, महान् एवं मानवहितैषी इंद्र! तुम्हारी क्रोधभरी सेनाएं जब युद्ध करती हैं, तब तुम्हारे हाथ में स्थित वज्र हमारी रक्षा के लिए गिरे. तुम्हारा सब ओर जाने वाला मन विचलित न हो. (१) नि दुर्ग इन्द्र श्लथिह्यमित्रानभि ये नो मर्तासो अमन्ति. आरे तं शंसं कृणुहि निनित्सोरा नो भर सम्भरणं वसूनाम्.. (२) हे इंद्र! युद्ध में जो लोग हमारे सामने आकर हमें पराजित करते हैं, उन शत्रुओं का नाश करो. हमारी निंदा के इच्छुक व्यक्ति का नाम मिटा दो. हमें धन का समूह दो. (२) शतं ते शिप्रिन्नूतयः सुदासे सहस्रं शंसा उत रातिरस्तु. जहि वधर्वंनुषो मर्त्यस्यास्मे द्युम्नमधि रत्नं च धेहि.. (३) हे साफा वाले इंद्र! तुम्हारे सैकड़ों रक्षासाधन एवं हजारों कामनाएं एवं धन मुझ सुदास के हों. हिंसक मनुष्य के आयुध का तुम नाश करो एवं हमारे लिए दीप्तिशाली यश एवं रत्न दो. (३) त्वावतो हीन्द्र क्रत्वे अस्मि त्वावतोऽवितुः शूर रातौ. विश्वेदहानि तविषीव उग्रँ ओकः कृणुष्व हरिवो न मर्धीः.. (४) हे इंद्र! मैं तुम्हारे समान महान् व्यक्ति के यज्ञकर्म में लगा हूं. मैं तुम्हारे समान रक्षक के ebook converter DEMO Watermarks*

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