भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 1061

एवा तमाहुरूत शृण्व इन्द्र एको विभक्ता तरणिर्मघानाम्. मिथस्तुर ऊतयो यस्य पूर्वीरस्मे भद्राणि सश्चत प्रियाणि.. (४) इंद्र के विषय में ऋत्विज् कहते हैं कि वे अकेले ही धन बांटने एवं विपत्तियों से पार करने वाले हैं. यह भी सुना गया है कि इंद्र के पास परस्पर मिले अनेक रक्षासाधन हैं. इंद्र की कृपा से हमें प्रिय कल्याणप्रद वस्तुएं मिलें. (४) एवा वसिष्ठ इन्द्रमूतये नृन्कृष्टीनां वृषभं सुते गृणाति. सहस्रिण उप नो माहि वाजान् यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (५) वसिष्ठ ऋषि सोमरस निचुड़ जाने पर मनुष्यों की रक्षा के लिए प्रजाओं के अभिलाषापूरक इंद्र की स्तुति इस प्रकार करते हैं. हे इंद्र! हमारे हजारों प्रकार के अन्न एवं कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (५) सूक्त—२७ देवता—इंद्र इन्द्रं नरो नेमधिता हवन्ते यत्पार्या युनजते धियस्ताः. शूरो नृषाता शवसश्चकान आ गोमति व्रजे भजा त्वं नः.. (१) जब युद्ध की तैयारी होने लगती है तो नेता युद्ध में इंद्र को बुलाते हैं. हे शूर, मनुष्यों के पोषक एवं शक्ति की कामना करने वाले इंद्र! हमें गायों वाली गोशाला में पहुंचाओ. (१) य इन्द्र शुष्मो मघवन्ते अस्ति शिक्षा सखिभ्यः पुरुहूत नृभ्यः. त्वं हि दृळ्हा मघवन्विचेता अपा वृधि परिवृतं न राधः.. (२) हे बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! तुम्हारा जो बल है, उसे अपने सखा स्तोताओं को दो. तुमने दृढ़ शत्रुनगरियों को छिन्नभिन्न किया है. तुम बुद्धि का प्रकाश करके छिपा हुआ धन हमारे लिए प्रकट करो. (२) इन्द्रो राजा जगतश्चर्षणीनामधि क्षमि विषुरूपं यदस्ति. ततो ददाति दाशुषे वसूनि चोदद्राध उपस्तुतश्चिदवार्क.. (३) इंद्र पशु आदि गतिशील प्राणियों एवं मनुष्यों के स्वामी हैं. धरती में नानारूप धन है, उसके राजा भी इंद्र हैं. हव्यदाता को धन देने वाले इंद्र हमारी स्तुति सुनकर धन हमारे सामने भेजें. (३) नू चिन्न इन्द्रो मघवा सहूती दानो वाजं नि यमते न ऊती. अनूना यस्य दक्षिणा पीपाय वामं नृभ्यो अभिवीता सखिभ्यः.. (४) हमने धनस्वामी एवं दानशील इंद्र को मरुतों के साथ बुलाया है. वे हमारी रक्षा के लिए ebook converter DEMO Watermarks*