भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1086, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1086

उतेदानीं भगवन्तः स्यामोत प्रपित्व उत मध्ये अह्नाम्. उतोदिता मघवन्सूर्यस्य वयं देवानां सुमतौ स्याम.. (४) हे भगदेव! हम इस समय एवं दिन का मध्य प्राप्त होने पर धनी बनें. हे धनस्वामी भग! हम सूर्योदय के समय देवों की कृपा प्राप्त करें. (४) भग एव भगवाँ अस्तु देवास्तेन वयं भगवन्तः स्याम. तं त्वा भग सर्व इज्जोहवीति स नो भग पुरएता भवेह.. (५) हे देवो! भग ही धनवान् हों. उसी धन से हम भी धनवान् हों. हे भग! सब लोग तुम्हें बार-बार बुलाते हैं. इस यज्ञ में तुम हमारे अनुगामी बनो. (५) समध्वरायोपसो नमन्त दधिक्रावेव शुचये पदाय. अर्वाचीनं वसुविदं भगं नो रथमिवाश्वा वाजिन आ वहन्तु.. (६) घोड़ा जिस प्रकार चलने योग्य मार्ग पर जाता है, उसी प्रकार उषा देवी हमारे यज्ञ में आवें. तेज चलने वाले घोड़े जैसे रथ को लाते हैं, उसी प्रकार उषा भग को हमारे सामने लावें. (६) अश्वावतीर्गोमतीर्न उषासो वीरवतीः सदमुच्छन्तु भद्राः. घृतं दुहाना विश्वतः प्रपीता यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (७) भद्रा, अश्वों, गायों एवं पुत्रादि जन से युक्त जल बरसाती हुई तथा सभी गुणों वाली उषा हमारा रात का अंधकार मिटावें. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (७) सूक्त—४२ देवता—विश्वेदेव प्र ब्रह्माणो अङ्गिरसो नक्षन्त प्र क्रन्दनुर्नभन्यस्य वेतु. प्र धेनव उदप्रुतो नवन्त युज्यतामद्री अध्वरस्य पेशः.. (१) अंगिरा नाम के ऋषि सब जगह व्याप्त हों. पर्जन्य हमारे स्तोत्र की विशेषरूप से अभिलाषा करें. नदियां जल सींचती हुई प्रवाहित हों. यजमान एवं उसकी पत्नी यज्ञ का रूप बनावें. (१) सुगस्ते अग्ने सनवित्तो अध्वा युक्ष्वा सुते हरितो रोहितश्च. ये वा सद्मन्नरुषा वीरवाहो हुवे देवानां जनिमानि सत्त:.. (२) हे अग्नि! चिरकाल से प्राप्त तुम्हारा मार्ग सुगम हो. तुम्हारे काले और लाल रंग के जो घोड़े तुम्हें यज्ञशाला में ले जाते हुए शोभा पाते हैं, उन्हें तुम रथ में जोड़ो. मैं यज्ञशाला में बैठा हुआ देवों को बुलाता हूं. (२) ebook converter DEMO Watermarks*