ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1089, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंको बुलाते हैं. (२) दधिक्रावाणं बुबुधानो अग्निमुप ब्रुव उषसं सूर्यं गाम्. ब्रध्नं मँश्चतोर्वरुणस्य बभ्रुं ते विश्वास्मद् दुरिता यावयन्तु.. (३) दधिक्रा देव को जगाता हुआ मैं अग्नि, उषा, सूर्य एवं भूमि की स्तुति करता हूं. मैं अभिमानियों को नष्ट करने वाले वरुण के महान् एवं पीले रंग के घोड़े की स्तुति करता हूं. वे हमसे सभी पाप दूर करें. (३) दधिक्रावा प्रथमो वाज्यर्वाग्रे रथानां भवति प्रजानन्. संविदान उषसा सूर्येणादित्येभिर्वसुभिरङ्गिरोभिः.. (४) सभी अश्वों में प्रमुख, शीघ्रगामी एवं गतिशील दधिक्रा जानने योग्य बातों को भली प्रकार जानकर उषा, सूर्य, आदित्यों, वसुओं और अंगिराओं के साथ सहमत होकर बैठते हैं. (४) आ नो दधिक्राः पथ्यामनक्त्वृतस्य पन्थामन्वेतवा उ. शृणोतु नो दैव्यं शर्धो अग्निः शृण्वन्तु विश्वे महिषा अमूराः.. (५) दधिक्रा देव यज्ञमार्ग पर अनुगमन करने के इच्छुक हम लोगों के मार्ग को सींचें. अग्नि हमारे दैवी बल एवं स्तोत्र को सुनें. मूढ़तारहित एवं महान् विश्वेदेव मेरी स्तुति सुनें. (५) सूक्त—४५ देवता—सविता आ देवो यातु सविता सुरत्नोऽन्तरिक्षप्रा वहमानो अश्वैः. हस्ते दधानो नर्या पुरूणि निवेशयञ्च प्रसुवञ्च भूम.. (१) शोभनरत्नों से युक्त, अपने तेज से अंतरिक्ष को पूर्ण करने वाले एवं अपने घोड़ों द्वारा ढोए जाते हुए सविता देव अनेक मानवहितकारी धनों को हाथ में धारण करते हैं. वे प्राणियों को स्थापित करते हैं एवं कर्म में लगाते हैं. वे यहां आवें. (१) उदस्य बाहू शिथिरा बृहन्ता हिरण्यया दिवो अन्ताँ अनष्टाम्. नूनं सो अस्य महिमा पनिष्ट सूरश्चिदस्मा अनु दादपस्याम्.. (२) दान के निमित्त फैलाई हुई, विशाल एवं सोने की भुजाओं को सविता देव अंतरिक्ष में व्याप्त करें. हम सविता की उसी महिमा की आज प्रशंसा कर रहे हैं. सूर्य भी सविता को कर्म की इच्छा दें. (२) स घा नो देवः सविता सहावा साविषद्ध्वसुपतिर्वसूनि. विश्रयमाणो अमतिमुरूचीं मर्तभोजनमध रासते नः.. (३) ebook converter DEMO Watermarks*