ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1102, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्र णोऽवत सुमतिभिर्यजत्राः प्र वाजेभिस्तिरत पुष्यसे नः.. (५) मरुद्गण हमारे यज्ञकर्म से प्रसन्न हों. मरुद्गण निंदारहित, शुद्ध एवं दूसरों को पवित्र करने वाले हैं. हे यज्ञपात्र मरुतो! हमारी स्तुतियों के कारण हमारी रक्षा विशेषरूप से करो एवं हमें अन्न के द्वारा पुष्ट होने के लिए बढ़ाओ. (५) उत स्तुतासो मरुतो व्यन्तु विश्वेभिर्नामभिर्नरो हवींषि. ददात नो अमृतस्य प्रजायै जिगृत रायः सूनृता मघानि.. (६) वे मरुद्गण हमारी स्तुति सुनकर हव्य भक्षण करें। नेता मरुद्गण जलों के साथ वर्तमान हैं. हे मरुतो! हमारी प्रजा के लिए उदक दो तथा हव्यदाता यजमान को सत्व एवं धनदान करो. (६) आ स्तुतासो मरुतो विश्व ऊती अच्छा सूरीन्त्सर्वताता जिगात. ये नस्त्मना शतिनो वर्धयन्ति यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (७) हे मरुतो! तुम स्तुति सुनकर समस्त रक्षासाधनों के साथ यज्ञ में आओ तथा अपने स्तोताओं को अपने आप सैकड़ों सुखों से युक्त करो. तुम अपने कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (७) सूक्त—५८ देवता—मरुद्गण प्र साकमुक्षे अर्चता गणाय यो दैव्यस्य धाम्नस्तुविष्मान्. उत क्षोदन्ति रोदसी महित्वा नक्षन्ते नाकं निर्ऋतेरवंशात्.. (१) हे स्तोताओ! तुम सदा वर्षा करने वाले मरुद्गण की पूजा करो. वे देवस्थान स्वर्ग में सबसे अधिक बुद्धिमान् हैं. वे अपनी महिमा से द्यावा-पृथिवी को भी भग्न कर देते हैं. वे स्वर्ग को धरती और अंतरिक्ष की अपेक्षा अधिक व्याप्त बना देते हैं. (१) जनूश्चिद्द्रो मरुतस्त्वेष्येण भीमासस्तुविमन्यवोऽयासः. प्र ये महोभिरोजसोत सन्ति विश्वो वो यामन्भयते स्वर्दृक्.. (२) हे भयानक, अधिक बुद्धि वाले एवं गतिशील मरुतो! तुम्हारा जन्म तेज वाले रुद्रों से हुआ है. तुम तेज एवं बल से प्रभावशाली हुए हो. तुम्हारे गमन में सूर्य को देखने वाले सब लोग डरते हैं. (२) बृहद्वयो मघवद्भयो दधात जुजोषन्निन्मरुतः सुष्टुतिं नः. गतो नाध्वा वि तिराति जन्तुं प्र णः स्पार्हाभिरूतिभिस्तिरेत.. (३) हे मरुतो! तुम हव्य धारण करने वाले को बहुत सा अन्न दो एवं हमारी शोभनस्तुति को ebook converter DEMO Watermarks*