भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1104, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1104

अस्माकमद्य मरुतः सुते सचा विश्वे पिबत कामिनः.. (३) हे मरुतो! तुम में जो अवर है, मैं उसे छोड़कर भी स्तुति नहीं करता. हमारा सोम निचुड़ जाने पर तुम सब सोमाभिलाषी बनकर एवं मिलकर उसे पिओ. (३) नहि व ऊतिः पृतनासु मर्षति यस्मा अराध्वं नरः. अभि व आवर्तृमतिर्नवीयसी तूयं यात पिपीषवः.. (४) हे नेता मरुतो! जिसे तुम अभिलषित धन देते हो, उसे तुम्हारी रक्षा युद्ध में शत्रुओं से चाहती है. तुम्हारी नवीन कृपा हमारे सामने आवे. हे सोमपान के अभिलाषी मरुतो! तुम जल्दी आओ. (४) ओ षु घृष्विराधसो यातानन्धांसि पीतये. इमा वो हव्या मरुतो ररे हि कं मो ष्वन्यत्र गन्तन.. (५) हे परस्पर मिले हुए धन वाले मरुतो! तुम सोमरूपी हव्य भोगने के लिए भली प्रकार आओ. मैं तुम्हें यह हवि देता हूं. तुम दूसरी जगह मत जाओ. (५) आ च नो बर्हिः सदताविता च नः स्पार्हाणि दातवे वसु. असेधन्तो मरुतः सोम्ये मधौ स्वाहेह मादयाध्वै.. (६) हे मरुतो! हमारे कुशों पर बैठो. तुम हमारा चाहा हुआ धन देने के लिए हमारे समीप आओ. इस यज्ञ में तुम मदकारक सोमरस को स्वाहा कहकर पिओ और प्रमुदित बनो. (६) सस्वश्चिद्धि तन्व१ः शुम्भमाना आ हंसासो नीलपृष्ठा अपप्तन्. विश्वं शर्धो अभितो मा नि षेद नरो न रण्वाः सवने मदन्तः.. (७) हे छिपे हुए मरुतो! तुम अपने अंगों को अलंकारों से सुशोभित करते हुए नीले रंग वाले हंसों के समान आओ. मेरे यज्ञ में जिस तरह सब मनुष्य प्रसन्न हैं, उसी प्रकार मरुद्गण भी आकर बैठें. (७) यो नो मरुतो अभि दुर्हृणायुस्तिरश्चित्तानि वसवो जिघांसति. द्रुहः पाशान्प्रति स मुचीष्ट तपिष्ठेन हन्मना हन्तना तम्.. (८) हे प्रशंसा के योग्य मरुतो! सबके द्वारा तिरस्कृत जो आदमी अशोभन रूप से क्रोध करके हमारे चित्त को दुःखी करना चाहता है, वह पापों के द्रोही वरुण देव के पाशों से हमें बांधेगा. तुम उसे तापकारी आयुध से मारो. (८) सान्तपना इदं हविर्मरुतस्तज्जुजुष्टन. युष्माकोती रिशादसः.. (९) हे शत्रुतापक मरुतो! यही तुम्हारा हवि है. हे शत्रुक्षक मरुतो! तुम अपनी रक्षा द्वारा ebook converter DEMO Watermarks*