भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1115, कुल 1855 में से

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आ यातं मित्रावरुणा जुषाणावाहुतिं नरा. पातं सोममृतावृधा.. (१९) हे यज्ञनेता मित्र व वरुण! तुम सोमरूपी आहुति को स्वीकार करते हुए आओ एवं यज्ञ की वृद्धि करते हुए सोमपान करो. (१९) सूक्त—६७ देवता—अश्विनीकुमार प्रति वां रथं नृपती जरध्यै हविष्मता मनसा यज्ञियेन. यो वां दूतो न धिष्ण्यावजीगरच्छा सूनुर्न पितरा विवक्मि.. (१) हे ऋत्विज् व यजमानरूपी मनुष्यों के स्वामी अश्विनीकुमारो! हम हव्य एवं स्तोत्र लेकर तुम्हारे रथ की स्तुति करने जाते हैं. हे स्तुतियोग्य अश्विनीकुमारो! जैसे पुत्र पिता को जगाता है, उसी प्रकार दूतरूप में जगाने वाले तुम्हारे रथ को अपने सामने आने के लिए मैं स्तुति करता हूं. (१) अशोच्यग्निः समिधानो अस्मे उपो अदृश्रन्तमसश्चिदन्ताः. अचेति केतुरुषसः पुरस्ताच्छ्रिये दिवो दुहितुर्जायमानः.. (२) अग्नि हमारे द्वारा प्रज्वलित होकर प्रकाशित होते हैं, वे लोग अंधकार वाले भागों को भी देखते हैं. ज्ञापन करने वाले सूर्य उषा वाली पूर्व दिशा में शोभा के लिए उदित होते हैं एवं लोग उन्हें देखते हैं. (२) अभि वां नूनमश्विना सुहोता स्तोमैः सिषक्ति नासत्या विवक्वान्. पूर्वीभियतिं पथ्याभिर्वाक्स्वर्विदा वसुमता रथेन.. (३) हे शोभन होता एवं स्तुति बोलने वाले अश्विनीकुमारो! हम स्तुतिसमूहों द्वारा तुम्हारी सेवा करते हैं. तुम जल को जानने वाले एवं धनयुक्त रथ पर चढ़कर प्रचलित मार्ग द्वारा आओ. (३) अवोर्वां नूनमश्विना युवाकुर्हुवे यद्वां सुते माध्वी वसूयुः. आ वां वहन्तु स्थविरासो अश्वाः पिबाथो अस्मे सुषुता मधूनि.. (४) हे रक्षक एवं मधुविद्या कुशल अश्विनीकुमारो! जब तुम्हारी अभिलाषा से सोमरस निचूड़ जाता है तब मैं धन की इच्छा से तुम्हारी स्तुति करता हूं. तुम्हारे स्वस्थ घोड़े तुम्हें यहां लावें. तुम हमारे द्वारा भली प्रकार निचोड़े गए सोमरस को पिओ. (४) प्राचीमु देवाश्विना धियं मेऽमृध्रां सातये कृतं वसूयुम्. विश्वा अविष्टं वाज आ पुरन्धीस्ता नः शक्तं शचीपती शचीभिः.. (५) हे अश्विनीकुमारो! तुम हमारी सरला, अपराजित एवं धन चाहने वाली बुद्धि को लाभ के ebook converter DEMO Watermarks*

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