भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1127, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1127

त इद्देवानां सधमाद आसन्नृतावानः कवयः पूर्व्यासः. गूह्ळं ज्योतिः पितरो अन्वविन्दन्सत्यमन्त्रा अजनयन्नुषासम्.. (४) जिन सत्ययुक्त, क्रांतदर्शी व पूर्वकाल में उत्पन्न पितरों ने अंधकार से ढके तेज को प्राप्त किया एवं सत्यमंत्र शक्ति वाला बनकर उषाओं को उत्पन्न किया, वे देवों के साथ-साथ प्रमुदित होते थे. (४) समान ऊर्वे अधि सङ्गतासः सं जानते न यतन्ते मिथस्ते. ते देवानां न मिनन्ति व्रतान्यमर्धन्तो वसुभिर्यादमानाः.. (५) वे पितर पणि द्वारा चुराई गायों को प्राप्त करने हेतु मिले थे एवं एक निश्चय पर पहुंचे थे. क्या उन्होंने मिलकर यत्न नहीं किया था? अर्थात् अवश्य किया था. वे देवसंबंधी यज्ञकर्मों का विनाश नहीं करते थे एवं हित न करते हुए उषा के वासदाता तेजों से मिलते थे. (५) प्रति त्वा स्तोमैरीळते वसिष्ठा उषर्बुधः सुभगते तुष्टुवांसः. गवां नेत्री वाजपत्नी न उच्छोषः सुजाते प्रथमा जरस्व.. (६) हे सुंदरी उषा! प्रातःकाल जगाने वाले वसिष्ठवंशीय ऋषि स्तोत्रों द्वारा तुम्हारी बार-बार स्तुति करते हैं. हे गाएं प्राप्त कराने वाली एवं अन्नदात्री उषा! हमारे लिए प्रकाश करो. हे शोभनजन्म वाली उषा! तुम्हारी स्तुति सर्वप्रथम हो. (६) एषा नेत्री राधसः सूनृतानामुषा उच्छन्ती रिभ्यते वसिष्ठैः. दीर्घश्रुतं रयिमस्मे दधाना यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (७) स्तुतियों की नेत्री उषा अंधकार नष्ट करती हुई स्तोता को एवं हमें सर्वत्र प्रसिद्ध धन देती है. हम वसिष्ठगोत्रीय ऋषि इस की स्तुति करते हैं. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (७) सूक्त—७७ देवता—उषा उपो रुरुचे युवतिर्न योषा विश्वं जीवं प्रसुवन्त चरायै. अभूदग्निः समिधे मानुषाणामकर्ज्योतिर्बाधमाना तमांसि.. (१) यौवनप्राप्त नारी के समान उषा समस्त जीवों को संचार के लिए प्रेरित करती हुई सूर्य के पास प्रकाशित होती है. अग्नि मनुष्यों द्वारा प्रज्वलित करने योग्य हुए हैं एवं अंधकार मिटाने वाला प्रकाश फैलाते हैं. (१) विश्वं प्रतीची सप्रथा उदस्थादृशद्वासो बिभ्रती शुक्रमश्वैत्. हिरण्यवर्णा सुदृशीकसन्दृग्गवां माता नेत्र्यह्नामरोचि.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*