ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1129, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रति षीमग्निरुजरते समिद्धः प्रति विप्रासो मतिभिर्गृणन्तः. उषा याति ज्योतिषा बाधमाना विश्वा तमांसि दुरिताप देवी.. (२) प्रज्वलित होकर अग्नि सब जगह बढ़ते हैं. विद्वान् ऋत्विज् स्तुतियों द्वारा उषा की प्रार्थना करते हैं. प्रकाश द्वारा अंधकारों को नष्ट करती हुई उषा देवी हमारे पाप समाप्त करती हुई आती है. (२) एता उ त्याः प्रत्यदृश्रन् पुरस्ताज्ज्योतिर्यच्छन्तीरुषसो विभातीः. अजीजनन्सूर्यं यज्ञमग्निमपाचीनं तमो अगादजुष्टम्.. (३) ये प्रसिद्ध, प्रभात करने वाली एवं तेज को बढ़ाने वाली उषाएं पूर्व दिशा में दिखाई देती हैं. उषाओं ने सूर्य, अग्नि और यज्ञ को जन्म दिया, जिससे नीचे जाने वाला एवं अप्रिय अंधकार नष्ट हो गया. (३) अचेति दिवो दुहिता मघोनी विश्वे पश्यन्त्युषसं विभातीम्. आस्थाद्रथं स्वधया युज्यमानमा यमश्वासः सुयुजो वहन्ति.. (४) स्वर्गपुत्री एवं धनस्वामिनी उषा को सब जानते हैं. प्रभात करने वाली उषा को सब लोग देखते हैं. उषा अन्नयुक्त रथ पर सवार है एवं भली प्रकार जुड़े हुए घोड़े इस रथ को वहन करते हैं. (४) प्रति त्वाद्य सुमनसो बुधन्तास्माकासो मघवानो वयं च. तिल्विलायध्वमुषसो विभातीर्यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (५) हे उषा! हमारे शोभनमन वाले तथा धनस्वामी लोग एवं हम आज तुम्हें जगाते हैं. हे प्रभातकारिणी उषाओ! तुम संसार को स्नेहयुक्त कर दो. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (५) सूक्त—७९ देवता—उषा व्यु१षा आवः पथ्या३ जनानां पञ्च क्षितीर्मानुषीर्बोधयन्ती. सुसन्दृग्भिरुक्षभिर्भानुमश्रेद्वि सूर्यो रोदसी चक्षसावः.. (१) मनुष्यों का हित करने वाली उषा अंधकार मिटाती है, मानवों की पांच श्रेणियों को जगाती है एवं उत्तम तेज वाली किरणों द्वारा सूर्य का सहारा लेती है. सूर्य अपने तेज से द्यावा-पृथिवी को ढक लेता है. (१) व्यञ्जते दिवो अन्तेष्वक्तून्विशो न युक्ता उषसो यतन्ते. सं ते गावस्तम आ वर्तयन्ति ज्योतिर्यच्छन्ति सवितेव बाहू.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*