ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1132, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे उषा! वह विचित्र धन हमें दो, जो दूरदूर तक प्रसिद्ध है. हे स्वर्गपुत्री! तुम्हारे पास मानवों के उपभोग के योग्य जो धन है, वह हमें दो. हम उसका उपभोग करेंगे. (५) श्रवः सूरिभ्यो अमृतं वसुत्वनं वाजाँ अस्मभ्यं गोमतः. चोदयित्री मघोनः सूनृतावत्युषा उच्छदप स्रिधः.. (६) हे उषा! स्तोताओं को नाशरहित एवं निवासयुक्त यश दो. हमें गायों वाला धन दो. यजमान को प्रेरणा देने वाली एवं सत्य से प्रेम करने वाली उषा शत्रुओं को दूर करें. (६) सूक्त—८२ देवता—इंद्र व वरुण इद्रावरुणा युवमध्वराय नो विशे जनाय महि शर्म यच्छतम्. दीर्घप्रयज्युमति यो वनुष्यति वयं जयेम पृतनासु दूढ्यः.. (१) हे इंद्र व वरुण! तुम हमारे परिचारक के लिए यज्ञ करने के निमित्त विशाल गृह दो. जो शत्रु हमारे अधिक समय तक यज्ञ करने वाले सेवक को मारना चाहता है, हम उस दुर्बुद्धि को युद्ध में जीतेंगे. (१) सम्राळन्यः स्वराळन्य उच्यते वां महान्ताविन्द्रावरुणा महावसू. विश्वे देवासः परमे व्योमनि सं वामोजो वृषणा सं बलं दधुः.. (२) हे महान् एवं परम धनी इंद्र एवं वरुण! तुम में से एक सम्राट् एवं दूसरे स्वराट् हैं. हे अभिलाषापूरको! सब देवों ने तुम्हें उत्तम आकाश में तेज के साथ ही बल प्रदान किया था. (२) अन्वपां खान्यतृन्मोजसा सूर्यमैरयतं दिवि प्रभुम्. इन्द्रावरुणा मदे अस्य मायिनोऽपिन्चतमपितः पिन्वतं धियः.. (३) हे इंद्र एवं वरुण! तुमने बलपूर्वक जल के द्वार खोले एवं आकाश में वर्तमान सूर्य को चलने के लिए प्रेरित किया. इस मादक सोम का नशा चढ़ने पर तुम जलरहित नदियों को जलपूर्ण करो एवं हमारे कर्मों को सफल बनाओ. (३) युवामिद्युत्सु पृतनासु वह्नयो युवां क्षमस्य प्रसवे मितज्ञवः. ईशाना वस्व उभयस्य कारव इन्द्रावरुणा सुहवा हवामहे.. (४) हे इंद्र एवं वरुण! युद्धभूमि में शत्रुसेना के मध्य फंसे हुए स्तोता एवं पैर सिकोड़कर बैठे हुए अंगिरागोत्रीय नौ ऋषि रक्षा के लिए तुम्हें ही बुलाते हैं. हे दिव्य एवं पार्थिव धन के स्वामियो एवं सुखपूर्वक बुलाने योग्यो! हम तुम्हें बुलाते हैं. (४) इन्द्रावरुणा यदिमानि चक्रथुर्विश्वा जातानि भुवनस्य मज्मना. ebook converter DEMO Watermarks*