ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1161, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहै. (८) ये पाकशंसं विहरन्त एवैर्ये वा भद्रं दूषयन्ति स्वधाभिः. अहये वा तान् प्रददातु सोम आ वा दधातु निरृतेरुपस्थे.. (९) जो राक्षस मुझ सत्यवादी को अपने स्वार्थों के कारण बदनाम करते हैं एवं जो बली राक्षस मुझ भले आदमी को दोषी ठहराते हैं, सोमदेव उन्हें सांप को दे दें अथवा पाप देव की गोद में धारण करें. (९) यो ना रसं दिप्सति पित्वो अग्ने यो अश्वानां यो गवां यस्तनूनाम्. रिपुः स्तेनः स्तेयकृद्ध्रमेतु नि ष हीयतां तन्वा३ तना च.. (१०) हे अग्नि! जो राक्षस हमारे अन्न का रस नष्ट करना चाहता है, जो हमारी गायों, घोड़ों एवं संतानों के सार समाप्त करना चाहता है, वह शत्रु, चोर एवं धन छीनने वाला नाश को प्राप्त हो. वह अपने शरीर एवं संतान दोनों से नाश को प्राप्त हो. (१०) परः सो अस्तु तन्वा३ तना च तिस्रः पृथिवीरधो अस्तु विश्वाः. प्रति शुष्यतु यशो अस्य देवा यो ना दिवा दिप्सति यश्च नक्तम्.. (११) राक्षस शरीर एवं संतान दोनों से हीन हो. वह तीनों लोकों के नीचे चला जाए. हे देवो! जो राक्षस हमें रात-दिन मारना चाहता है, उसका यश सूख जाए. (११) सुविज्ञानं चिकितुषे जनाय सच्चासच्च वचसी पस्पृधाते. तयोर्यत्सत्यं यतरदृजीयस्तदित्सोमोऽवति हन्त्यासत्.. (१२) विद्वान् यह बात सरलता से जान सकता है कि सत्य एवं असत्य बातों में परस्परविरोध होता है, उन में सोम सत्य एवं सरल बात का पालन करते हैं एवं असत्य बात का नाश करते हैं. (१२) न वा उ सोमो वृजिनं हिनोति न क्षत्रियं मिथुया धारयन्तम्. हन्ति रक्षो हन्त्यासद्वदन्तमुभाविन्द्रस्य प्रसितौ शयाते.. (१३) पापी एवं झूठ बोलने वाला शक्तिशाली हो, तब भी सोम उसे नहीं छोड़ते. वे असत्यवादी एवं राक्षस को मारते हैं. ये दोनों मरकर इंद्र के बंधन में सोते हैं. (१३) यदि वाहमनृतदेव आस मोघं वा देवाँ अप्यूहे अग्ने. किमस्मभ्यं जातवेदो हृणीषे द्रोघवाचस्ते निर्ऋथं सचन्ताम्.. (१४) हे अग्नि! क्या मैं झूठे देवों की भक्ति करता हूं अथवा फल न देने वाले देवों का उपासक हूं? फिर तुम मुझसे क्यों क्रुद्ध हो? झूठ बोलने वाले ही तुम्हारी हिंसा विशेषरूप से प्राप्त करें. ebook converter DEMO Watermarks*