ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1169, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र देव! तुम आओ और दर्शनीय धन द्वारा प्रसन्न बनो. तुम मरुतों के साथ पिए जाते हुए सोमरस से अपने तालाब के समान विशाल उदर को भर लो. (२३) आ त्वा सहस्रमा शतं युक्ता रथे हिरण्यये. ब्रह्मयुजो हरय इन्द्र केशिनो वहन्तु सोमपीतये.. (२४) हे इंद्र! ब्रह्म से युक्त सैकड़ों और हजारों घोड़े सोमरस पीने के लिए तुम्हें सोने के बने रथ पर ढोवें. (२४) आ त्वा रथे हिरण्यये हरी मयूरशेप्या. शितिपृष्ठा वहतां मध्वो अन्धसो विवक्षणस्य पीतये.. (२५) मोर के रंग वाले एवं सफेद पीठ वाले घोड़े स्तुतियोग्य मधुर सोमरस पीने के लिए इंद्र को सोने के बने रथ में बैठा कर ढोवें. (२५) पिबा त्व१स्य गिर्वणः सुतस्य पूर्वपा इव. परिष्कृतस्य रसिन इयमासुतिश्चारुर्मदाय पत्यते.. (२६) हे स्तुतियों द्वारा प्रशंसनीय इंद्र! तुम सर्वप्रथम सोमरस पीने वाले की तरह निचोड़े हुए सोमरस को पिओ. यह शुद्ध, रसीला, नशीला एवं सुंदर सोमरस नशा उत्पन्न करने के लिए ही बनाया गया है. (२६) य एको अस्ति दंसना महाँ उग्रो अभि व्रतैः. गमत्स शिप्री न स योषदा गमद्धवं न परि वर्जति.. (२७) जो इंद्र अपने कार्यों द्वारा एकमात्र महान् एवं शूर हैं, जो सबको पराजित करने वाले एवं सिर पर टोप धारण करने वाले हैं, केवल वे ही आवें एवं हमसे अलग न हों. वे हमारे स्तोत्र को सुनकर हमारे सामने आवें एवं हमारा त्याग न करें. (२७) त्वं पुरं चरिष्ण्वं वधैः शुष्णस्य सं पिणक्. त्वं भा अनु चरो अध द्विता यदिन्द्र हव्यो भुवः.. (२८) हे इंद्र! तुमने शुष्ण असुर के चलतेफिरते निवासस्थान को अपने वज्र से पीस डाला था. हे स्तोता एवं यज्ञकर्त्ता—दोनों के द्वारा बुलाने योग्य इंद्र! तुमने तेजस्वी होकर शुष्ण असुर का पीछा किया था. (२८) मम त्वा सूर उदिते मम मध्यन्दिने दिवः. मम प्रपित्वे अपिशर्वरे वसवा स्तोमासो अवृत्सत.. (२९) हे निवासस्थान देने वाले इंद्र! तुम सूर्योदय के समय, दोपहर होने पर, दिन की समाप्ति ebook converter DEMO Watermarks*