भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 1199

अश्विनीकुमारो! स्तोत्रों के साथ आओ. (७) किमन्ये पर्यासतेऽस्मत्स्तोमेभिरश्विना. पुत्रः कण्वस्य वामृषिर्गीर्भिर्वत्सो अवीवृधत्.. (८) मेरे अतिरिक्त कौन स्तोत्रों द्वारा अश्विनीकुमारों की उपासना कर सकता है? कण्व के पुत्र वत्स ऋषि ने तुम्हें अपनी स्तुतियों द्वारा बढ़ाया. (८) आ वां विप्र इहावसेऽह्वत्स्तोमेभिरश्विना. अरिप्रा वृत्रहन्तमा ता नो भूतं मयोभुवा.. (९) हे अश्विनीकुमारो! स्तोता ने स्तुति द्वारा तुम्हें रक्षण के लिए बुलाया है. तुम शत्रुहंता, पापरहित और शोभन हो. तुम हमारे लिए सुख का वर्षण करो. (९) आ यद्वां योषणा रथमतिष्ठद्वाजिनीवसू. विश्वान्याश्विना युवं प्र धीतान्यगच्छतम्.. (१०) हे यज्ञोपयुक्त धन वाले अश्विनीकुमारो! सूर्या नामक नारी तुम्हारे रथ पर सवार हुई थी. तुम सभी मनचाहे पदार्थ पाओ. (१०) अतः सहस्रनिर्णिजा रथेना यातमश्विना. वत्सो वां मधुमद्वचोऽशंसीत्काव्यः कविः.. (११) हे अश्विनीकुमारो! तुम अपने स्थान से हजाररूपों वाले रथ द्वारा आओ. मेधावी पिता के मेधावी पुत्र वत्स ऋषि ने मधुर वचन बोले थे. (११) पुरुमन्द्रा पुरूवसू मनोतरा रयीणाम्. स्तोमं मे अश्विनाविममभि वह्नी अनूषाताम्.. (१२) हे अधिक मोद वाले, पर्याप्त धन वाले एवं धनदाता अश्विनीकुमारो! तुम संसार का वहन करते हुए मेरी इस स्तुति की प्रशंसा करो. (१२) आ नो विश्वान्याश्विना धत्तं राधांस्यह्रया. कृतं न ऋत्वियावतो मा नो रीरधतं निदे.. (१३) हे अश्विनीकुमारो! हमें प्रशंसनीय संपत्तियां दो एवं समय पर संतान उत्पन्न करने योग्य बनाओ. तुम हमें शत्रु के अधिकार में मत देना. (१३) यन्नासत्या परावति यद्वा स्थो अध्यम्बरे. अतः सहस्रनिर्णिजा रथेना यातमश्विना.. (१४) ebook converter DEMO Watermarks*