ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1201, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे नेता अश्विनीकुमारो! जिन रक्षासाधनों से तुमने धन पाने के अभिलाषी त्रसदस्यु को बचाया था, उन्हीं के द्वारा हमें अन्न पाने के लिए बचाओ. (२१) प्र वां स्तोमाः सुवृक्तयो गिरो वर्धन्त्वश्विना. पुरुत्रा वृत्रहन्तमा ता नो भूतं पुरुस्पृहा.. (२२) हे बहुतों की रक्षा करने वाले एवं शत्रुनाशकों में श्रेष्ठ अश्विनीकुमारो! दोषरहित स्तुतिवचन एवं स्तोत्र तुम्हें बढ़ावें! तुम हमारे लिए अनेक प्रकार से चाहने योग्य बनो. (२२) त्रीणि पदान्यश्विनोराविः सान्ति गुहा परः. कवी ऋतस्य पत्मभिर्वाग्जीवेभ्यस्परि.. (२३) अश्विनीकुमारों का तीन पहियों वाला रथ छिपा रहने के बाद प्रकट होता है. हे बुद्धिमान् अश्विनीकुमारो! यज्ञ पूर्ण करने में सहायक अपने रथ द्वारा हमारे सामने आओ. (२३) सूक्त—९ देवता—अश्विनीकुमार आ नूनमश्विना युवं वत्सस्य गन्तमवसे. प्रास्मै यच्छतमवृकं पृथु च्छर्दियुयुतं या अरातयः.. (१) हे अश्विनीकुमारो! तुम वत्स ऋषि की रक्षा के लिए निश्चित रूप से गए थे. तुम इन्हें बाधारहित एवं विस्तृत घर दो एवं इनके शत्रुओं को समाप्त करो. (१) यदन्तरिक्षे यद्दिवि यत्पञ्च मानुषाँ अनु. नृम्णं तद्धत्तमश्विना.. (२) हे अश्विनीकुमारो! जो धन अंतरिक्ष में, स्वर्ग में अथवा पांच वर्ग वाले लोगों के पास है, वह हमें दो. (२) ये वां दंसांस्याश्विना विप्रासः परिमामृशुः. एवेत्काण्वस्य बोधतम्.. (३) हे अश्विनीकुमारो! जिस बुद्धिमान् स्तोता ने बार-बार तुम्हारे यज्ञों का अनुष्ठान किया है उसे जानो. इसी प्रकार कण्व के पुत्र के यज्ञों को जानो. (३) अयं वां घर्मो अश्विना स्तोमेन परि षिच्यते. अयं सोमो मधुमान्वाजिनीवसू येन वृत्रं चिकेतथः.. (४) हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारा यज्ञसंबंधी कड़ाह मंत्र बोलने के साथ गीला किया जाता है. हे अन्न एवं धन के स्वामी अश्विनीकुमारो! यह वही मीठा सोमरस है, जिसे पीकर तुमने वृत्र को जाना था. (४) ebook converter DEMO Watermarks*