भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1216, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1216

इंद्र ने गुहा में छिपी हुई गायों को बाहर निकालकर अंगिरागोत्रीय ऋषियों को दिया था एवं गायों को चुराने वाले बल को औंधा कर दिया था. (८) इन्द्रेण रोचना दिवो दृळ्हानि दृंहितानि च. स्थिराणि न पराणुदे.. (९) इंद्र ने दीप्तिशाली नक्षत्रों को शक्तिशाली एवं दृढ़ किया था. उन स्थिर नक्षत्रों को कोई नीचे नहीं गिरा सकता. (९) अपामूर्मिर्मदन्निव स्तोम इन्द्राजिरायते. वि ते मदा अराजीषुः.. (१०) हे इंद्र! एक-दूसरे के ऊपर चलने वाली सागर की तरंगों के समान तुम्हारी स्तुतियां शीघ्रता से गति करती हैं. तुम्हारे मद विशेष रूप से दीप्तिशाली बनते हैं. (१०) त्वं हि स्तोमवर्धन इन्द्रास्युक्थवर्धनः. स्तोतॄणामुत भद्रकृत्.. (११) हे इंद्र! तुम स्तुतियों एवं उक्थों द्वारा बढ़ने वाले हो एवं स्तोताओं का कल्याण करते हो. (११) इन्द्रमित्केशिना हरी सोमपेयाय वक्षतः. उप यज्ञं सुराधसम्.. (१२) केश धारण करने वाले दो घोड़े शोभनधन वाले इंद्र को यज्ञ के समीप ले जाते हैं. (१२) अपां फेनेन नमुचेः शिर इन्द्रोदवर्तयः. विश्वा यदजयः स्पृधः.. (१३) हे इंद्र! जब तुमने विरोध करने वाली सभी असुर-सेनाओं को हराया था, उसी समय वज्र पर जलों का फेन लपेटकर तुमने नमुचि का सिर काटा था. (१३) मायाभिरुत्सिसृप्सत इन्द्र द्यामारुरुक्षतः. इव दस्यूँरधूनुथाः.. (१४) हे इंद्र! तुमने मायाओं के द्वारा विस्तार पाने के इच्छुक एवं स्वर्ग पर चढ़ने के अभिलाषी शत्रु राक्षसों को औंधा कर दिया था. (१४) असुन्वामिन्द्र संसदं विषूचीं व्यनाशयः. सोमपा उत्तरो भवन्.. (१५) हे सोमपानकर्त्ता इंद्र! तुमने अत्यंत उत्कृष्ट होकर सोमरस न निचोड़ने वाले लोगों को परस्पर विरोध द्वारा निर्बल बनाकर समाप्त किया. (१५) सूक्त—१५ देवता—इंद्र तम्वभि प्र गायत पुरुहूतं पुरुष्टुतम्. इन्द्रं गीर्भिस्तविषमा विवासत.. (१) उन्हीं इंद्र की स्तुति करो, जिन्हें बहुतों ने बुलाया है और बहुतों ने जिनकी स्तुति की है. ebook converter DEMO Watermarks*