भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1231, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1231

हे सोम की वर्षा से सींचने वाले अध्वर्युगण! वर्षा करने वाले मरुतों की शक्ति बढ़ाने के लिए हव्य अर्पित करो. इस हव्य के द्वारा मरुद्गण वर्षाकारक एवं उत्तमगति वाले बनते हैं. (९) वृषणश्वेन मरुतो वृषप्सुना रथेन वृषनाभिना. आ श्येनासो न पक्षिणो वृथा नरो हव्या नो वीतये गत.. (१०) हे नेता मरुतो! सेचन-समर्थ अश्वों से युक्त, वर्षाकारक रूप से युक्त एवं वर्ष की नाभियुक्त रथ पर चढ़कर हव्य के समीप इस प्रकार शीघ्र आओ, जिस प्रकार बाज पक्षी आता है. (१०) समानमञ्ज्वेषणां वि भ्राजन्ते रुक्मासो अधि बाहुषु. दविद्युतत्यृष्टयः.. (११) इन मरुतों का रूप प्रकट करने वाला आभरण समान है, इनकी भुजाओं में तेजस्वी सुनहरे हार विराजते हैं. इनके हाथों में आयुध चमकते हैं. (११) त उग्रासो वृषण उग्रबाहवो नकिष्टनूषु येतिरे. स्थिरा धन्वान्यायुधा रथेषु वोऽनीकेष्वधि श्रियः.. (१२) उग्र, वर्षाकारक एवं शक्तिशाली भुजाओं वाले मरुद्गण अपने शरीर की रक्षा का कोई यत्न नहीं करते. हे मरुतो! तुम्हारे रथों पर धनुष एवं बाण स्थिर है. सेना के अग्रभाग में तुम्हारी ही विजय होती है. (१२) येषामर्णो न सप्रथो नाम त्वेषं शश्वतामेकमिद्धुजे. वयो न पित्र्यं सहः.. (१३) जल के समान सब ओर विस्तृत एवं दीप्तिशाली मरुतों का नाम एक है, फिर भी वे स्तोताओं के भोग के लिए उसी प्रकार यथेष्ट हैं. जिस प्रकार पिता से मिला हुआ अन्न होता है. (१३) तान्वन्दस्व मरुतस्ताँ उप स्तुहि तेषा हि धुनीनाम्. अराणां न चरमस्तदेषां दाना मह्ना तदेषाम्.. (१४) हे अंतरात्मा! उन मरुतों की स्तुति करो एवं वंदना करो. मरुतों का दान महिमायुक्त है. महान् मरुतों की अपेक्षा हम उसी प्रकार छोटे हैं, जिस प्रकार किसी महान् स्वामी का हीन सेवक होता है. (१४) सुभगः स व ऊतिष्वास पूर्वासु मरुतो व्युष्टिषु. यो वा नूनमुतासति.. (१५) हे मरुतो! तुम्हारी रक्षा प्राप्त करके स्तोता प्राचीनकाल में शोभन धनवाला बना था. जो स्तोता है, वह अवश्य तुम्हारा भक्त बनता है. (१५) ebook converter DEMO Watermarks*