भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1237, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1237

हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारे रथ का एक पहिया स्वर्गलोक में चलता है एवं दूसरा तुम्हारे साथ चलता है. हे जल के स्वामी अश्विनीकुमारो! तुम्हारी कल्याणकारिणी बुद्धि इस प्रकार हमारे समीप आवे, जिस प्रकार गाय बछड़े के पास आती है. (४) रथा यो वां त्रिवन्धुरो हिरण्याभीशुरश्विना. परि द्यावापृथिवी भूषति श्रुतस्तेन नासत्या गतम्.. (५) हे अश्विनीकुमारो! ऐसा प्रसिद्ध है कि सारथि के तीन स्थानों वाला एवं सोने की लगामों वाला तुम्हारा रथ द्यावा-पृथिवी को अपने प्रकाश से चमकाता है. तुम उसी रथ से हमारे पास आओ. (५) दशस्यन्ता मनवे पूर्व्यं दिवि यवं वृकेण कर्षथः. ता वामद्य सुमतिभिः शुभस्पती अश्विना प्र स्तुवीमहि.. (६) हे अश्विनीकुमारो! तुमने प्राचीनकाल में द्युलोक का जल राजा मनु को देकर हल द्वारा जौ की खेती करना सिखाया था. हे जल के स्वामी अश्विनीकुमारो! आज उत्तम स्तोत्रों द्वारा हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. (६) उप नो वाजिनीवसू यातमृतस्य पथिभिः. येभिस्तृक्षिं वृषणा त्रासदस्र्यवं महे क्षत्राय जिन्वथः.. (७) हे अन्न एवं धन के स्वामी अश्विनीकुमारो! यज्ञ के मार्ग द्वारा हमारे पास आओ. हे धन देने वाले अश्विनीकुमारो! इसी मार्ग द्वारा तुमने त्रसदस्यु के पुत्र तृक्षि को महान् संपत्ति देकर तृप्त किया था. (७) अयं वामद्रिभिः सुतः सोमो नरा वृषण्वसू. आ यातं सोमपीतये पिबतं दाशुषो गृहे.. (८) हे नेताओं एवं स्तोताओं को धन बरसाने वाले अश्विनीकुमारो! तुम्हारे लिए यह सोमरस पत्थरों की सहायता से निचोड़ा गया है. तुम सोमपान के लिए आओ और हव्यदाता यजमान के घर में सोम पिओ. (८) आ हि रुहतमश्विना रथे कोशे हिरण्यये वृषण्वसू. युञ्जाथां पीवरीरिषः.. (९) हे धन बरसाने वाले अश्विनीकुमारो! सोने की लगाम से युक्त, आयुधों के कोश के समान एवं आनंददाता रथ पर चढ़ो तथा हमें विशाल अन्न दो. (९) याभिः पक्थमवथो याभिरध्रिगुं याभिर्ऋभुं विजोषणम्. ताभिर्नो मक्षू तूमश्विना गतं भिषज्यतं यदातुरम्.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*