ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1267, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे अभिलाषापूरक इंद्र! तुम्हारे लिए सोमरस निचोड़ने वाला अभिलाषापूरक होकर सोमरस निचोड़े. हे सरल गति वाले इंद्र! हमें धन दो. हे हरि नामक अश्वों के सामने स्थित होने वाले एवं अभिलाषापूरक इंद्र! जल में सोम निचोड़ने वाले ने उसे तुम्हारे लिए धारण किया है. (१२) एन्द्र याहि पीतये मधु शविष्ठ सोम्यम्. नायमच्छा मधवा शृणवद् गिरो ब्रह्मोक्था च सुक्रतुः.. (१३) हे अतिशय बलवान् इंद्र! मधुर सोमरस पीने के लिए यहां आओ. धनवान् एवं शोभन यज्ञकर्म वाले इंद्र बिना आए हुए स्तुतियां स्तोत्र एवं मंत्र नहीं सुनते. (१३) वहन्तु त्वा रथेष्ठामा हरयो रथयुजः. तिरश्चिदर्यं सवनानि वृत्रहन्नन्येषां या शतक्रतो.. (१४) हे वृत्रहंता एवं सैकड़ों बुद्धियों वाले इंद्र! रथ में जुते हुए घोड़े अन्य लोगों के यज्ञों का तिरस्कार करके तुझ रथ में स्थिर स्वामी को हमारे यज्ञ में लावें. (१४) अस्माकमद्यान्तं स्तोमं धिष्व महामह. अस्माकं ते सवना सन्तु शन्तमा मदाय द्युक्ष सोमपाः.. (१५) हे परमपूज्य इंद्र! आज अत्यंत समीपवर्ती हमारे स्तोम नामक यज्ञ को धारण करो. हे दीप्तिशाली एवं सोमरस पीने वाले इंद्र! तुम्हारे मद के लिए होने वाले हमारे यज्ञ कल्याणकारक हों. (१५) नहि षस्तव नो मम शास्त्रे अन्यस्य रण्यति. यो अस्मान्वीर आनयत्.. (१६) जो शूर इंद्र हमारा नेतृत्व करते हैं. वे मेरे, तुम्हारे अथवा किसी अन्य के शासन में प्रसन्न नहीं होते. (१६) इन्द्रश्चिद्घा तदब्रवीत्स्त्रिया अशास्यं मनः. उतो अह क्रतुं रघुम्.. (१७) इंद्र ने ही कहा था—"स्त्री के मन पर शासन संभव नहीं है स्त्री की बुद्धि छोटी होती है." (१७) सप्ती चिद्घा मदच्युता मिथुना वहतो रथम्. एवेदधूर्वृष्ण उत्तरा.. (१८) सोमरस की ओर जाने वाले इंद्र के दोनों घोड़े रथ को वहन करते हैं. इस प्रकार कामवर्षक इंद्र का रथ सबसे श्रेष्ठ है. (१८) अधः पश्यस्व मोपरि सन्तरां पादकौ हर. मा ते कशप्लकौ दृशन्त्स्त्री हि ब्रह्मा बभूविथ.. (१९) ebook converter DEMO Watermarks*