ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1313, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंस प्र ममन्दत्त्वाया शतक्रतो प्राचामन्यो अहंसन.. (९) हे अनेक कर्म करने वाले, प्राचीन-क्रोध वाले एवं संग्राम में अपना महत्त्व प्रकाशित करने वाले इंद्र! कोई व्यक्ति बुद्धिरहित हो या बुद्धिमान् हो, यदि वह तुम्हारी स्तुति करता है तो तुम्हारी दया से आनंद प्राप्त करता है. (९) उग्रबाहुर्मृक्षकृत्वा पुरन्दरो यदि मे शृणवद्धवम्. वसूयवो वसुपतिं शतक्रतुं स्तोमैरिन्द्रं हवामहे.. (१०) ऊपर भुजा उठाए हुए, शत्रुओं का वध करने वाले एवं शत्रुनगरों को ध्वस्त करने वाले इंद्र यदि मेरी पुकार सुनें तो धन की कामना करने वाले हम लोग धनस्वामी एवं असीमित बुद्धि वाले इंद्र को स्तोत्रों द्वारा बुलावेंगे. (१०) न पापासो मनामहे नारायासो न जल्हव:. यदिन्विन्द्रं वृषणं सचा सुते सखायं कृणवामहै.. (११) पुण्य न करने वाले हम इंद्र को नहीं मानते. धनरहित एवं अग्नि की उपासना करने वाले हम इंद्र को नहीं मानते. इस समय सोमरस निचुड़ जाने पर हम अभिलाषापूर्वक इंद्र को अपना मित्र बनाते हैं. (११) उग्रं युयुज्म पृतनासु सासहिम्णकातिमदाभ्यम्. वेदा भृमं चित्सनिता रथीतमॊ वाजिनं यमिदू नशत्.. (१२) हम उग्र, युद्धों में शत्रुओं को जीतने वाले, ऋण के समान फलप्रद स्तुति वाले एवं किसी से न दबने वाले इंद्र को अपनी ओर मिलाते हैं. रथस्वामियों में श्रेष्ठ इंद्र तेज चलने वाले घोड़े को पहचानते हैं. दाता इंद्र अनेक यजमानों में व्याप्त हैं. (१२) यत इन्द्र भयामहे ततो नो अभयं कृधि. मघवञ्छग्धि तव तन्न ऊतिभिर्वि द्विषो वि मृधो जहि.. (१३) हे इंद्र! हम जिस हिंसक से डरते हैं, उससे हमें भयरहित बनाओ. हे धनस्वामी एवं शक्तिशाली इंद्र! हमें भयरहित करने के लिए अपने रक्षक पुरुषों द्वारा हमारे हिंसक शत्रुओं को मारो. (१३) त्वं हि राधस्पते राधसो महः क्षयस्यासि विधतः. तं त्वा वयं मघवन्निन्द्र गिर्वणः सुतावन्तो हवामहे.. (१४) हे धनस्वामी इंद्र! तुम्हीं सेवक का महान् धन एवं घर बढ़ाते हो. हे धनस्वामी एवं स्तुतिपात्र अग्नि! हम सोमरस निचोड़ने वाले तुम्हें बुलाते हैं. (१४) ebook converter DEMO Watermarks*