भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1326, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1326

के समान इस समय कमजोर हम लोगों को पहले के समान न मारे. (२०) वि षु द्वेषो व्यंहतिमादित्यासो वि संहितम्. विष्वग्वि वृहता रपः.. (२१) हे आदित्यो! हमारे द्वेषियों एवं पापियों का विनाश करो तथा इस जाल एवं सब जगह फैले हुए पाप का नाश करो. (२१) सूक्त—५७ देवता—इंद्र आ त्वा रथं यथोतये सुम्नाय वर्तयामसि. तुविकूर्मिमृतीषहमिन्द्र शविष्ठ सत्पते.. (१) हे अतिशय शक्तिशाली, हिंसकों को हराने वाले, बहुत कर्म करने वाले एवं सज्जनपालक इंद्र! हम सुरक्षा और सुख पाने के लिए तुम्हें रथ के समान बार-बार बुलाते हैं. (१) तुविशुष्म तुविक्रतो शचीवो विश्‍वया मते. आ पप्रथ महित्वना.. (२) हे अधिक शक्तिशाली, अनेक कर्म करने वाले, अधिक बुद्धिमान् एवं पूजनीय इंद्र! तुमने विश्वव्यापक महत्त्व द्वारा संसार को व्याप्त किया है. (२) यस्य ते महिना महः परि ज्मायन्तमीयतुः. हस्ता वज्रं हिरण्ययम्.. (३) हे महान् इंद्र! तुम्हारी महिमा के कारण तुम्हारे हाथ धरती में सब जगह व्याप्त हिरण्यमय वज्र को पकड़ते हैं. (३) विश्वानरस्य वस्पतिमाननतस्य शवसः. एवैश्च चर्षणीनामूती हुवे रथानाम्.. (४) हे मरुतो! मैं समस्त शत्रुओं पर आक्रमण करने वाले एवं शत्रुओं द्वारा न झुकने वाली शक्ति के स्वामी इंद्र को तुम्हारी सेनाओं एवं रथों के गमनों के साथ बुलाता हूं. (४) अभिष्टये सदावृधं स्वर्मीळ्हेषु यं नरः. नाना हवन्त ऊतये.. (५) हे यजमानो! मैं तुम्हारी सहायता के लिए सदा बढ़ने वाले इंद्र को आने के लिए निवेदन करता हूं. उन्हें मनुष्य युद्धों में अपनी श्रद्धा के निमित्त भांति-भांति से बुलाते हैं. (५) परोमात्रमृचीषममिन्द्रमुग्रं सुराधसम्. ईशानं चिद्वसूनाम्.. (६) मैं असीमित शरीर वाले, स्तुति के अनुरूप रूपधारी, उग्र, शोभनधन से युक्त एवं संपत्तियों के स्वामी इंद्र को बुलाता हूं. (६) ebook converter DEMO Watermarks*