भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1336, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1336

हम शत्रुओं से बचने के लिए सुख एवं भयहीनता के लिए अग्नि की स्तुति करते हैं. संपूर्ण प्रजाओं के रक्षक अग्नि ऋषियों को निवासस्थान देने वाले तथा बुलाने योग्य हैं. (१५) सूक्त—६१ देवता—अग्नि हविष्कृणुध्वमा गमदध्वर्युर्वनते पुनः. विद्वाँ अस्य प्रशासनम्.. (१) हे अध्वर्युगण! अग्नि आए हैं. तुम उन्हें शीघ्र हव्य दो. हव्य देना जानने वाले अध्वर्यु यज्ञ की पुनः सेवा करते हैं. (१) नि तिग्ममभ्यं१ शुं सीदद्धोता मनावधि. जुषाणो अस्य सख्यम्.. (२) होता तीखी ज्वाला वाले अग्नि की मित्रता यजमान से कराता हुआ अग्नि के पास बैठता है. (२) अन्तरिच्छन्ति तं जने रुद्रं परो मनीषया. गृभ्णन्ति जिह्वया ससम्.. (३) होता अपनी बुद्धि के बल से यजमान का मनोरथ पूरा करने के लिए दुःख नष्ट करने वाले अग्नि को सामने स्थापित करना चाहते हैं. होता बाद में अग्नि की स्तुतियां बोलते हुए ग्रहण करते हैं. (३) जाम्यतीतपे धनुर्वयोधा अरुहद्वनम्. दृषदं जिह्वयावधीत्.. (४) अन्य देने वाले अग्नि सबसे ऊपर वर्तमान अंतरिक्ष को भी अतिक्रमण कर जाते हैं. अपनी ज्वाला से मेघ का वध करने वाले अग्नि जल को मुक्त करने के लिए ऊपर चढ़ते हैं. (४) चरन्वत्सो रुशन्निह निदातारं न विन्दते. वेति स्तोतव अम्ब्यम्.. (५) बछड़े के समान इधर-उधर घूमने वाले एवं श्वेत रंग वाले अग्नि को इस संसार में रोकने वाला कोई नहीं मिलता, वे स्तोता के स्तोत्रों की कामना करते हैं. (५) उतो न्वस्य यन्महदश्वावद्योजनं बृहत्. दामा रथस्य ददृशे.. (६) अंतरिक्ष में आदित्यरूपी अग्नि के रथ में घोड़े जोड़ने का महान् एवं विशाल कार्य दिखाई देता है तथा रथ की रस्सियां दिखाई देती हैं. (६) दुहन्ति सप्तैकामुप द्वा पञ्च सृजतः. तीर्थे सिन्धोरधि स्वरे.. (७) शब्द करने वाले सिंधु तट पर सात ऋत्विज् जल का दोहन करते हैं. इन में भी दो शेष पांच को प्रयुक्त करते हैं. (७)