भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1353, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1353

है. तुम इसे पिओ, क्योंकि तुम इसके स्वामी हो. (८) यं ते श्येनः पदाभरत्तिरो रजांस्यस्पृतम्. पिबेदस्य त्वमीशिषे.. (९) हे इंद्र! बाज पक्षी का रूप धारण करने वाली गायत्री अंतरिक्ष के रक्षकों का तिरस्कार करके शत्रुओं द्वारा न छुए गए जिस सोमरस को पैरों द्वारा लाई थी, उसे तुम पिओ, क्योंकि तुम उसके स्वामी हो. (९) सूक्त—७२ देवता—विश्वेदेव देवानामिदवो महत्तदा वृणीमहे वयम्. वृष्णामस्मभ्यमूतये.. (१) हे अभिलाषापूरक देवो! हम अपने यज्ञ के उद्देश्य से तुम्हारी विशाल रक्षा पाने के लिए प्रार्थना करते हैं. (१) ते नः सन्तु युजः सदा वरुणो मित्रो अर्यमा. वृधासश्च प्रचेतसः.. (२) हे देवो! शोभन स्तुति वाले एवं हमारे धनवर्धक वरुण, मित्र एवं अर्यमा हमारे सहायक हों. (२) अति नो विष्विता पुरु नौभिरपो न पर्षथ. यूयमृतस्य रथ्यः.. (३) हे यज्ञ के नेता देवो! जिस प्रकार नाव जल के पार ले जाती है, उसी प्रकार तुम हमें विशाल शत्रुसेना के पार ले जाओ. (३) वामं नो अस्त्वर्यमन्वामं वरुण शंस्यम्. वामं ह्यावृणीमहे.. (४) हे अर्यमा देव! हमें अपनाने योग्य धन दो. हे वरुण! हमारे पास सबके द्वारा प्रशंसा करने योग्य धन हो. हम तुमसे धन मांगते हैं. (४) वामस्य हि प्रचेतस ईशानासो रिशादसः. नेमादित्या अघस्य यत्.. (५) हे उत्तम ज्ञान वाले एवं शत्रुओं को भगाने वाले देवों! तुम उत्तम धन के स्वामी हो. हे आदित्यो! वह धन हमारे पास न आए जो पाप द्वारा कमाया गया हो. (५) वयमिद्वः सुदानवः क्षियन्तो यान्तो अध्वन्ना. देवा वृधाय हुमहे.. (६) हे शोभनदान वाले देवो! हम चाहे अग्निहोत्र हेतु घर में रहते हों अथवा समिधाएं लाने हेतु मार्ग में हों, हम तुम्हें हव्य द्वारा बढ़ने के लिए बुलाते हैं. (६) अधि न इन्द्रैषां विष्णो सजात्यानाम्. इता मरुतो अश्विना.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित) · पृष्ठ 1353, कुल 1855 में से · BharatKosha