भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1361, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1361

त्वं दाता प्रथमो राधसामस्यसि सत्य ईशानकृत्. तुविद्युम्नस्य युज्या वृणीमहे पुत्रस्य शवसो महः.. (२) हे इंद्र! तुम सबसे मुख्य, धनदाता एवं सत्य हो. तुम स्तोताओं को ऐश्वर्य वाला बनाओ. हे बहुत धन वाले, बल के पुत्र एवं महान् इंद्र! हम तुम्हारे योग्य धन को वरण करते हैं. (२) ब्रह्मा त इन्द्र गिर्वणः क्रियन्ते अनतिद्भूता. इमा जुषस्व हर्यश्व योजनेन्द्र या ते अमन्महि.. (३) हे स्तुति योग्य एवं हरि नामक अश्वों वाले इंद्र! हम तुम्हारे गुणों से पूर्ण स्तुतियां करते हैं. वे तुमसे मिलने योग्य हैं. उन्हें तुम स्वीकार करो. हम तुम्हारे लिए जितनी स्तुतियां कर रहे हैं, उन्हें स्वीकार करो. (३) त्वं हि सत्यो मघवन्नानतो वृत्रा भूरि न्युब्जसे. स त्वं शविष्ठ वज्रहस्त दाशुषेऽर्वाञ्चं रयिमा कृधि.. (४) हे सत्यशील, धनस्वामी एवं किसी से न दबने वाले इंद्र! तुम अनेक राक्षसों का नाश करते हो. हे हाथ में वज्र धारण करने वाले एवं अतिशय शक्तिशाली इंद्र! तुम हव्यदाता यजमान को सामने जाने वाला धन दो. (४) त्वमिन्द्र यशा अस्यूजीषी शवसस्पते. त्वं वृत्राणि हंस्यप्रतीन्येक इदनुत्ता चर्षणीधृता.. (५) हे शक्ति के स्वामी एवं ऋषीज के अधिकारी इंद्र! तुम यशस्वी बनो. तुमने अकेले ही शत्रुओं की हिंसा करने वाले वज्र द्वारा ऐसे राक्षसों को मारा जिन पर न कोई आक्रमण कर सकता था और न जिन्हें कोई जीत सकता था. (५) तमु त्वा नूनमसुर प्रचेतसं राधो भागमिवेमहे. महीव कृत्तिः शरणा त इन्द्र प्र ते सुम्ना नो अश्नवन्.. (६) हे शक्तिशाली एवं उत्तमज्ञान वाले इंद्र! हम तुमसे पैतृक संपत्ति के समान धन मांगते हैं. तुम्हारा घर तुम्हारे यश के समान विशालरूप से अंतरिक्ष में स्थित है. तुम्हारे सुख हमें प्राप्त करें. (६) सूक्त—८० देवता—इंद्र कन्या३ वारवायती सोममपि सुताविदत्. अस्तं भरन्त्यब्रवीदिन्द्राय सुनवै त्वा शक्राय सुनवै त्वा.. (१) जल की ओर स्नान हेतु जाती हुई कन्या अपाला ने मार्ग में सोमलता प्राप्त की. उसने ebook converter DEMO Watermarks*

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