ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1363, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयहाँ प्रस्तुत पृष्ठ का देवनागरी में पंक्ति-दर-पंक्ति लिप्यंतरण है:
सूक्त—८१ देवता—इन्द्र पान्तमा वो अन्धस इन्द्रमभि प्र गायत. विश्वासाहं शतक्रतुं मंहिष्ठं चर्षणीनाम्.. (१) हे ऋत्विजो! सोमरस पीने वाले अपने इंद्र की विशेष रूप से स्तुति करो. इंद्र सभी शत्रुओं को हराने वाले, सौ यज्ञ करने वाले एवं प्रजाओं को सर्वाधिक धन देने वाले हैं. (१) पुरुहूतं पुरुष्टुतं गाथान्यं१ सनश्रुतम्. इन्द्र इति ब्रवीतन.. (२) हे ऋत्विजो! तुम अनेक लोगों द्वारा बुलाए हुए, बहुत से लोगों द्वारा स्तुति, यज्ञगान के योग्य एवं सनातनरूप से प्रसिद्ध देव विशेष को इंद्र कहना. (२) इन्द्र इन्नो महानां दाता वाजानां नृतुः. महाँ अभिज्ञ्वा यमत्.. (३) हमें महान् अन्न देने वाले, बहुसंख्यक धन देने वाले और सबको बचाने वाले इंद्र हमारे सामने आकर धन प्रदान करें. (३) अपादु शिप्रयन्धसः सुदक्षस्य प्रहोषिणः. इन्दोरिन्द्रो यवाशिरः.. (४) शोभन नासिका वाले इंद्र ने भली प्रकार होम करने वाले सुदक्ष नामक ऋषि के दिए हुए सोमरस को पिया था, जो भुने हुए जौ से मिला तथा पात्रों में निचुड़ रहा था. (४) तम्वभि प्रार्चतेन्द्रं सोमस्य पीतये. तदिद्ध्रयस्य वर्धनम्.. (५) हे ऋत्विजो! सोमरस पीने के लिए इंद्र के सामने जाकर उनकी स्तुति करो. वह सोमपान ही इंद्र को बढ़ाता है. (५) अस्य पीत्वा मदानां देवो देवस्यौजसा. विश्वाभि भुवना भुवत्.. (६) दीप्तिशाली इंद्र सोम के नशीले रस को पीकर अपनी शक्ति द्वारा सारे संसार को पराजित करते हैं. (६) त्यमु वः सत्रासाहं विश्वांसु गीर्ष्वायतम्. आ च्यावयस्यूतये.. (७) हे स्तोता! बहुतों को पराजित करने वाले एवं सभी स्तुतिवचनों में व्याप्त इंद्र को रक्षा के लिए भली प्रकार बुलाओ. (७) युध्मं सन्तमनर्वाणं सोमपामनपच्युतम्. नरमवार्यक्रतुम्.. (८) शत्रुसंहारक, सत्ता वाले, अन्यों द्वारा अनाक्रांत, सोमरस पीने वाले, युद्धों में शत्रुओं द्वारा अपराजित एवं नेता इंद्र को कोई बाधा नहीं पहुंचा सकता. (८) ebook converter DEMO Watermarks*