भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1370, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1370

आ ते दधामीन्द्रियमुक्था विश्वा शतक्रतो. स्तोतृभ्य इन्द्र मृळय.. (२७) हे शतक्रतु इंद्र! मैं तुम्हारे लिए शक्तिशाली सोम एवं सभी स्तुतियों का संपादन करता हूं. हे इंद्र! तुम हमें सुख दो. (२७) भद्रम्भद्रं न आ भरेषमूर्जं शतक्रतो. यदिन्द्र मृळयासि नः.. (२८) हे शतक्रतु इंद्र! यदि तुम हमें सुखी करना चाहते हो तो हमें कल्याणकारी एवं सुखकारक धन दो, अन्न दो तथा बल दो. (२८) स नो विश्वान्या भर सुवितानि शतक्रतो. यदिन्द्र मृळयासि नः.. (२९) हे शतक्रतु इंद्र! यदि तुम हमें सुखी करना चाहते हो तो हमारे लिए सभी मंगल दो. (२९) त्वामिद्वृत्रहन्तम सुतावन्तो हवामहे. यदिन्द्र मृळयासि नः.. (३०) हे असुरहंताओं में श्रेष्ठ इंद्र! तुम हमें सुखी करना चाहते हो तो सोमरस निचोड़ने वाले हम तुम्हें बुलाते हैं. (३०) उप नो हरिभिः सुतं याहि मदानां पते. उप नो हरिभिः सुतम्.. (३१) हे सोमों के स्वामी इंद्र! तुम हर नामक घोड़ों की सहायता से हमारे द्वारा निचोड़े गए सोम के समीप आओ. (३१) द्विता यो वृत्रहन्तमो विद इन्द्रः शतक्रतुः. उप नो हरिभिः सुतम्.. (३२) शतक्रतु एवं शत्रुहंताओं में श्रेष्ठ इंद्र दो प्रकार से जाने जाते हैं. हे इंद्र! हरि नामक घोड़ों की सहायता से हमारे द्वारा निचोड़े हुए सोम के समीप आओ. (३२) त्वं हि वृत्रहन्नेषां पाता सोमानामसि. उप नो हरिभिः सुतम्.. (३३) हे वृत्रहंता इंद्र! तुम सोमरस पीने वाले हो, इसलिए हमारे द्वारा निचोड़े हुए सोमरस के पास हरि नामक घोड़ों की सहायता से आओ. (३३) इन्द्र इषे ददातु न ऋभुक्षणमृभुं रयिम्. वाजी ददातु वाजिनम्.. (३४) इंद्र अन्न देने के लिए हमें धनदाता ऋभुक्षा एवं ऋभु नामक देवों को दें. शक्तिशाली इंद्र हमें अपने भाई वाज को दें. (३४) सूक्त—८३ देवता—मरुद्गण गौर्धयति मरुतां श्रवस्युर्माता मघोनाम्. युक्ता वह्नी रथानाम्.. (१)

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