भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1377, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1377

को नष्ट करने वाले हो. तुम शक्तिशाली हुए थे. तुमने रुकी हुई नदियों को बहाया था एवं दास द्वारा अधिकार में किए गए जल को जीता था. (१८) स सुक्रतू रणिता यः सुतेष्वनुत्तमन्युर् अहेव रेवान्. य एक इन्नर्यपांसि कर्ता स वृत्रहा प्रतीदन्यमाहुः.. (१९) इंद्र शोभन बुद्धि वाले, निचोड़े हुए सोम से प्रसन्न होने वाले शत्रुओं द्वारा अविनष्ट क्रोध वाले, दिन के समान धनयुक्त, बिना किसी की सहायता से मानवहितकारी कर्म करने वाले, शत्रुनाशक एवं शत्रुसमूह के विरोधी हैं. (१९) स वृत्रहेन्द्रश्चर्षणीधृतं सुष्टुत्या हव्यं हुवेम. स प्राविता मघवा नोऽधिवक्ता स वाजस्य श्रवस्यस्य दाता.. (२०) हम शत्रुहंता, मानवपोषक एवं बुलाने योग्य इंद्र को अपनी शोभन स्तुति द्वारा बुलाते हैं. इंद्र हमारे विशेष रक्षक, धनस्वामी, हमारे प्रति सम्मानपूर्वक बोलने वाले एवं अन्न व कीर्ति चाहने वाले हैं. (२०) स वृत्रहेन्द्र ऋभुक्षाः सद्यो जज्ञानो हव्यो बभूव. कृण्वन्नपांसि नर्या पुरूणि सोमो न पीतो हव्यः सखिभ्यः.. (२१) वे वृत्रहंता एवं महान् इंद्र जन्म लेने के तुरंत बाद बुलाने योग्य हो गए थे. इंद्र बहुत से मानव हितसाधक कार्य करते हुए पिए हुए सोम के समान मित्रों द्वारा बुलाने योग्य बने थे. (२१) सूक्त—८६ देवता—इंद्र या इन्द्र भुज आभरः स्वर्वां असुरेभ्यः. स्तोतारमिन्मघवन्नस्य वर्धय ये च त्वे वृक्तबर्हिषः.. (१) हे सुखयुक्त एवं धनस्वामी इंद्र! तुम असुरों के पास से जो धन छीन लाये हो, उस धन से स्तोता को बढ़ाओ. वह स्तोता तुम्हारे लिए कुश बिछा चुका है. (१) यमिन्द्र दधिषे त्वमश्वं गां भागमव्ययम्. यजमाने सुन्वति दक्षिणावति तस्मिन् तं धेहि मा पणौ.. (२) हे इंद्र! तुम्हारे पास जो घोड़े, गाएं एवं अविनाशी धन है, वह सोमरस निचोड़ने वाले तथा दक्षिणा देने वाले यजमान को दो, दान न करने वाले पणि को मत दो. (२) य इन्द्र सस्त्यव्रतोऽनुष्वापमदेवयुः. स्वैः ष एवैर्मुमुरत्पोष्यं रयिं सनुतर्धेहि तं ततः.. (३)